बिहार के किसानों के लिए राहत की खबर है। खेती-किसानी के लिए लिया जाने वाला कर्ज अब पहले की तुलना में सस्ता हो सकता है। राज्य सरकार ने ऐसी व्यवस्था की है, जिसके तहत पात्र किसानों को 3 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर प्रभावी रूप से 3 प्रतिशत ब्याज का लाभ मिल सकेगा। खास बात यह है कि योजना का दायरा केवल जमीन के मालिक किसानों तक सीमित नहीं रखा गया है।
इस योजना को लागू करने के लिए बिहार सरकार ने नाबार्ड (NABARD) के साथ समझौता किया है। कृषि मंत्री विजय सिन्हा की मौजूदगी में कृषि विभाग और नाबार्ड के अधिकारियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
जानकारी के अनुसार, कृषि ऋण पर सामान्य तौर पर करीब 7 प्रतिशत ब्याज लगता है। केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान के बाद बिहार सरकार अपनी तरफ से 1 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान देगी। इस तरह पात्र किसानों के लिए 3 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर प्रभावी ब्याज दर करीब 3 प्रतिशत रह सकती है।
योजना का लाभ किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), फसल ऋण और अल्पावधि कृषि उत्पादन ऋण लेने वाले किसानों को मिलेगा। इसमें लघु और सीमांत किसानों के अलावा अन्य श्रेणी के किसान भी शामिल होंगे। वहीं, पात्र बटाईदार, मौखिक पट्टेदार और संयुक्त देयता समूह (JLG) के सदस्य भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। सभी प्रकार की फसलों को भी योजना के दायरे में रखा गया है।
अगर किसी किसान ने 3 लाख रुपये से अधिक का कृषि ऋण लिया है, तो भी ब्याज अनुदान का लाभ अधिकतम 3 लाख रुपये की राशि पर ही मिलेगा। 3 लाख रुपये से अधिक के ऋण वाले हिस्से पर अतिरिक्त ब्याज अनुदान नहीं दिया जाएगा।
हालांकि, योजना का लाभ लेने के लिए एक अहम शर्त भी रखी गई है। किसान को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना कृषि ऋण चुकाना होगा। समय पर कर्ज चुकाने वाले पात्र किसानों को ही ब्याज अनुदान का फायदा मिलेगा।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार सरकार ने इस योजना के तहत 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। सरकार का उद्देश्य किसानों को संस्थागत माध्यम से कृषि ऋण लेने के लिए प्रोत्साहित करना और खेती से जुड़े कर्ज का ब्याज बोझ कम करना है। यानी किसानों के लिए राहत का सीधा रास्ता समय पर कृषि ऋण चुकाने से जुड़ा है।
