June 27, 2026
image

पटना मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (पीएमसीएच) के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को स्वास्थ्य विभाग ने पदमुक्त कर दिया था।

उन पर आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्री निशांत द्वारा किए गए अस्पताल के निरीक्षण के दौरान वे बिना सूचना के अनुपस्थित थे। डॉ. नरेंद्र ने आरोपों को निराधार बताया है, जबकि विभाग का कहना है कि मंत्री के निरीक्षण से एक दिन पहले (22 जून) अस्पताल अधीक्षक ने डॉ. नरेंद्र को मोबाइल से इसकी सूचना दे दी थी। यह भी बताया था कि कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नरेंद्र को ही करना है, जिस पर उन्होंने सहमति भी दी थी। बावजूद उन्होंने प्रेस-वार्ता की। अब उच्च-स्तरीय समिति जांच करेगी और फिर आगे की कार्रवाई होगी।

घंटो बाद दी गई सूचना
विभाग का कहना है कि डॉ. नरेंद्र द्वारा जल जाने की सूचना कार्यक्रम के समाप्त होने के घंटों बाद दी गई थी। इससे स्पष्ट है कि मीडिया में खबर आने के बाद बचाव में वॉट्सएप पर यह सूचना दी गई। उनके निजी क्लीनिक में छद्म मरीज को भेजा गया। पाया गया कि वे प्रैक्टिस कर रहे थे। स्वास्थ्य विभाग और पटना के जिलाधिकारी की जांच के दौरान उनका सरकारी वाहन निजी क्लीनिक के बाहर पाया गया। कंपाउंडर ने बताया कि वे मरीज देखेंगे। उसने मरीज देखने का जो समय बताया, वह कार्यालय अवधि से मेल खाता था। अंततः कार्यों के प्रति लापरवाही, कर्तव्यहीनता, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग एवं अनाधिकृत अनुपस्थिति के कारण उन्हें प्राचार्य से पदमुक्त किए गए।

राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में मनोरोग विभाग में प्राध्यापक के पद पर स्थानांतरित किया गया। यह प्रशासनिक दृष्टिकोण से किया गया स्थानांतरण है, जो दंड की श्रेणी में नहीं आता है।
अनाधिकृत अनुपस्थिति के संबंध में विभाग को कोई आवेदन न देकर उन्होंने प्रेस-वार्ता की। यह आचरण बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली में निर्धारित प्रविधानों के प्रतिकूल है। उच्च-स्तरीय जांच समिति गठित कर डॉ. नरेंद्र का पक्ष लिया जाएगा और प्रक्रिया के अंतर्गत आगे की कार्रवाई होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *