परिवार के सदस्यों को हर वर्ष पांच लाख रुपए एवं 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के मरीज को पांच लाख रुपए तक की अतिरिक्त कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर करने वाली सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान योजना का लाभ नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कई मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड रहते उन्हें सिस्टम में शामिल कर योजना का लाभ दिलाने की लापरवाह व्यवस्था के कारण मरीजों के साथ स्वजन भी परेशान हैं।
इमरजेंसी में भर्ती सराय हाजीपुर के 64 वर्षीय सत्य नारायण, बक्सर की 55 वर्षीय लक्ष्मी कुमारी, पहलेजा घाट निवासी अभिषेक कुमार, लाल इमली निवासी 35 वर्षीय धीरज कुमार समेत कई मरीजों ने बताया कि उनके पास आयुष्मान कार्ड है।
कुछ ने कहा कि राशन कार्ड है, लेकिन आयुष्मान कार्ड नहीं बनाया गया। किसी ने कहा कि कार्ड है पर आधार कार्ड से लिंक नहीं है। यह सभी मरीज एक सप्ताह से अधिक समय से भर्ती हैं। सीटी स्कैन, MRI जैसी महंगी जांच, कई दवाइयां, जरूरी सामान बाजार से खरीदना पड़ रहा है। स्वजन ने कहा कि कार्ड दिखाने के बाद भी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कहा जाता है कि इसका लाभ लेने की प्रक्रिया जटिल है। संबंधित चिकित्सक की अनुमति के बाद कार्ड के लाभ के लिए पहले ऑनलाइन स्वीकृति लेनी होगी।
कई चरण में फाइल घूमने के बाद लाभ मिलने तक मरीज की अस्पताल से छुट्टी हो जाएगी। इस कारण चिकित्सक, स्वास्थ्य व अस्पताल प्रबंधक, आयुष्मान मित्र से लेकर अस्पताल प्रबंधन तक की योजना का लाभ मरीजों को दिलाने में दिलचस्पी नहीं है। स्वजन का आरोप है कि कार्ड के संबंध में अस्पताल में पूछा जाता है और न ही सहयोग किया जाता है। इमरजेंसी में भर्ती आर्थिक रूप से कमजोर पटना सिटी के शेखा का रोजा की रहने वाली मरीज सबीहा को जब आयुष्मान कार्ड रहते लाभ नहीं मिला तो बिना इलाज कराए अस्पताल से चली गई। एनएमसीएच की अधीक्षक डॉ. प्रो. रश्मि प्रसाद ने आयुष्मान कार्ड का लाभ मरीजों को नहीं मिलने की जानकारी मिलने पर आयुष्मान मित्र को अपने कक्ष में तलब किया। उन्होंने लाभ मिलने की प्रक्रिया को जाना।
इमरजेंसी में हर दिन जाकर लाभार्थियों को चिह्नित करते हुए उन्हें लाभ पहुंचाने का निर्देश दिया। अधीक्षक ने कहा कि विभागों में अध्यक्ष एवं स्वास्थ्य प्रबंधक को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूरी व्यवस्था की मानीटरिंग की जाएगी।
