September 15, 2026
EDUCATION

टाटा वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष डॉ. शाहनवाज आलम ने कहा कि सार्थक और संतुलित श्रम सुधारों के लिए ट्रेड यूनियन का दृष्टिकोण बेहद आवश्यक है। श्रम सुधारों के केंद्र में श्रमिकों को रखा जाना चाहिए। औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और व्यावसायिक लचीलेपन के साथ श्रमिकों की गरिमा, रोजगार सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और प्रभावी प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित होना चाहिए।
डॉ. आलम ने यह बात 12-13 सितंबर को कोलकाता स्थित वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज (WBNUJS) के यूनिवर्सिटी ऑडिटोरियम में आयोजित ‘CODE SHIFT – A National Conclave on Navigating the Labour Codes’ में कही। उन्होंने सम्मेलन के दो महत्वपूर्ण सत्रों में पैनलिस्ट के रूप में भाग लिया।
सम्मेलन का आयोजन Centre for Financial and Regulatory Governance Studies, WBNUJS ने All India Federation of Tax Practitioners (Eastern Zone) के सहयोग से किया। इसमें EPFO, ZTI Kolkata, ESIC, RO Kolkata और Tata Steel के Legal Department का भी सहयोग रहा।
औद्योगिक संबंध संहिता पर हुई चर्चा
‘The New Bargain’ विषय पर आयोजित सत्र में Industrial Relations Code के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। इसमें हड़ताल, ट्रेड यूनियन, सामूहिक सौदेबाजी, औद्योगिक विवादों के समाधान तथा श्रमिक अधिकारों और उद्योगों की जरूरत के बीच संतुलन पर विचार हुआ।
डॉ. आलम ने कहा कि उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए लचीलापन जरूरी है, लेकिन यह श्रमिकों के अधिकार, रोजगार सुरक्षा और श्रम की गरिमा की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने सामूहिक सौदेबाजी, प्रभावी श्रमिक प्रतिनिधित्व, औद्योगिक लोकतंत्र और निष्पक्ष विवाद समाधान व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई।
सुरक्षा को सिर्फ कानूनी अनुपालन तक सीमित न रखें
‘Safe by Design?’ सत्र में Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSHWC) Code पर चर्चा हुई। डॉ. आलम ने कहा कि कार्यस्थल की सुरक्षा को केवल कानूनी औपचारिकता के रूप में नहीं देखा जा सकता। सुरक्षा कार्यस्थल के डिजाइन, प्रक्रियाओं, उपकरणों और संगठनात्मक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा होनी चाहिए।
उन्होंने सुरक्षा प्रबंधन में श्रमिकों की सार्थक भागीदारी, प्रभावी परामर्श व्यवस्था, सुरक्षा समितियों की सक्रिय भूमिका और संगठन के प्रत्येक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
‘सुधारों का वास्तविक असर शॉप फ्लोर तक पहुंचे’
डॉ. आलम ने कहा कि नए Labour Codes की सफलता का आकलन केवल उनके कानूनी प्रावधानों से नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधित्व के बिना केवल संरक्षण पर्याप्त नहीं है। रोजगार, कार्य परिस्थितियों, सुरक्षा और औद्योगिक संबंधों से जुड़े निर्णयों में श्रमिकों और उनके प्रतिनिधियों की सार्थक भागीदारी होनी चाहिए।
उन्होंने प्रबंधन और श्रमिकों के बीच संवाद, परामर्श और साझेदारी की संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उद्योग और श्रमिकों के बीच विश्वास और सहयोग के आधार पर ही सुरक्षित, न्यायपूर्ण और टिकाऊ औद्योगिक संबंध व्यवस्था तैयार की जा सकती है।
सम्मेलन में विधि शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के अलावा कानूनी विशेषज्ञ, वरिष्ठ एचआर अधिकारी, पीएसयू और उद्योग जगत के प्रतिनिधि, श्रम विभाग के अधिकारी, श्रम कानून विशेषज्ञ, श्रम प्रशासक और ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि शामिल हुए। दो दिवसीय सम्मेलन में नई श्रम संहिताओं के प्रभाव, चुनौतियों और व्यावहारिक क्रियान्वयन पर व्यापक चर्चा हुई।

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