हिंदी दिवस पर हिंदी की लोकप्रियता और उसके महत्व की चर्चा आम है, लेकिन रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए आए आवेदन बताते हैं कि हिंदी के प्रति विद्यार्थियों और शोधार्थियों की रुचि सिर्फ हिंदी दिवस तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय में पीएचडी नामांकन की प्रक्रिया जारी है और हिंदी विभाग में शोध के लिए सबसे अधिक आवेदन आए हैं।
हिंदी विभाग में पीएचडी की 19 सीटों के लिए 42 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। सीटों की तुलना में यह संख्या दोगुने से भी अधिक है। आवेदन की संख्या के मामले में हिंदी के बाद इतिहास, अंग्रेजी और अर्थशास्त्र हैं।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. हीरानंदन प्रसाद के मुताबिक विभाग में शोध के प्रति रुचि लगातार बढ़ रही है। नेट और जेआरएफ पास करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। हर वर्ष करीब 10 से 15 विद्यार्थी नेट और जेआरएफ पास कर रहे हैं।
खास बात यह है कि हिंदी में शोध के विषय भी बदल रहे हैं। अब केवल साहित्य तक शोध सीमित नहीं है। किन्नर विमर्श, बाल विमर्श, वृद्ध विमर्श और आदिवासी विमर्श जैसे सामाजिक विषयों पर भी शोध हो रहा है। इसके अलावा समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों को हिंदी के साथ जोड़कर भी शोध किया जा रहा है।
वहीं, पीएचडी के लिए अन्य विषयों में भी सीटों से अधिक आवेदन आए हैं। इतिहास में 10 सीटों के लिए 41, अंग्रेजी में 25 सीटों के लिए 37 और अर्थशास्त्र में 12 सीटों के लिए 29 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। विश्वविद्यालय के अन्य विषयों में भी सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन इन विषयों में सीटों और आवेदनों के बीच अंतर अधिक है।
