उत्तरी अमेरिका में आयोजित हो रहे फीफा विश्व कप दो हजार छब्बीस के रोमांच ने असम सहित पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में फुटबॉल प्रेमियों के उत्साह को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। इस वैश्विक टूर्नामेंट के व्यापक प्रभाव से प्रभावित होकर हजारों बच्चे और युवा फुटबॉल मैदानों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं और अपने पसंदीदा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर खेल में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। फुटबॉल के प्रति बढ़ते इस जबरदस्त जुनून के बीच गुरुग्राम स्थित मेदांता-द मेडिसिटी के विशेषज्ञों ने युवा खिलाड़ियों में बढ़ती खेल संबंधी चोटों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। डॉक्टरों ने खिलाड़ियों को सुरक्षित रखने और चोट-मुक्त खेल का आनंद लेने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव व रणनीतियां साझा की हैं। गौरतलब है कि प्रतिष्ठित पत्रिका न्यूजवीक द्वारा मेदांता को भारत का सर्वश्रेष्ठ अस्पताल चुना गया है।
खेल से जुड़ी गंभीर चोटों के चिकित्सीय विश्लेषण पर बात करते हुए मेदांता गुरुग्राम के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के वाइस चेयरमैन डॉ. अतीक वास्देव ने बताया कि युवा फुटबॉलरों में होने वाली खेल चोटों में एंटीरियर क्रूसिएट लिगामेंट यानी एसीएल टियर सबसे गंभीर और आम चोटों में से एक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह घुटने की एक बेहद महत्वपूर्ण लिगामेंट चोट होती है, जिसके उचित उपचार और खिलाड़ी के पूर्ण रूप से स्वस्थ होने में कई महीनों का लंबा पुनर्वास यानी रिहैबिलिटेशन और रिकवरी समय लग सकता है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि युवाओं को मैदान पर उतरने से पहले सही वार्म-अप, शारीरिक स्ट्रेचिंग और सुरक्षात्मक उपायों का कड़ाई से पालन करना चाहिए ताकि वे किसी भी प्रकार की गंभीर शारीरिक क्षति से बचते हुए अपने खेल के सफर को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ा सकें।
