हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) सिंहभूम को अपने भविष्य के खनन विस्तार का प्रमुख केंद्र मानते हुए यहां बंद खदानों को फिर से शुरू करने और नए खनिज संसाधनों को विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। कंपनी को उम्मीद है कि सिंहभूम स्थित राखा माइंस में दिसंबर 2026 तक उत्पादन शुरू हो जाएगा। यह जानकारी HCL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अनूपम मिश्रा ने बुधवार को दी।
85वें CSIR फाउंडेशन डे कार्यक्रम में शामिल होने के बाद जमशेदपुर स्थित राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (NML) में मीडिया से बातचीत करते हुए मिश्रा ने कहा कि आने वाले वर्षों में सिंहभूम क्षेत्र HCL के विकास की सबसे बड़ी संभावनाओं में से एक है।
उन्होंने कहा, “आगे चलकर सबसे बड़ी संभावना सिंहभूम क्षेत्र में है।” उन्होंने बताया कि सिंहभूम कॉपर बेल्ट में HCL की तीन प्रमुख खदानें—सुरदा, केंदाडीह और राखा—हैं। सुरदा को 2024 के अंत में बंद किया गया था, जबकि केंदाडीह में जनवरी 2026 में दोबारा काम शुरू किया गया। अब कंपनी की नजर राखा माइंस को फिर से उत्पादन में लाने पर है।
मिश्रा ने कहा कि बंद भूमिगत खदान को दोबारा उत्पादन में लाना आसान नहीं होता और इसके लिए व्यापक भूमिगत विकास कार्य करना पड़ता है। सामान्य तौर पर बंद खदान में उत्पादन का आधार तैयार करने में दो से तीन साल तक का समय लग सकता है।
राखा माइंस के बारे में उन्होंने कहा कि जिस समय इसे बंद किया गया था, उस समय तांबे की कीमतों के कारण खनन आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं था। मौजूदा परिस्थितियों में इसका उत्पादन फिर से शुरू करना संभव है।
HCL के CMD ने बताया कि कंपनी सिंहभूम क्षेत्र में अन्य खनिज ब्लॉकों को विकसित करने की संभावनाएं भी तलाश रही है। कुछ ब्लॉकों में यूरेनियम के अंश होने के कारण इनके विकास के लिए परमाणु खनिज निदेशालय से आवश्यक मंजूरी लेनी होगी।
उन्होंने कहा कि कुछ ब्लॉकों के लिए HCL को संबंधित NOC मिल चुका है और आगे की मंजूरियों की प्रक्रिया चल रही है। कंपनी ने झारखंड सरकार से धारा 17A के तहत नामांकन के आधार पर खनिज ब्लॉकों के आवंटन का अनुरोध किया है। इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष भी उठाया गया है।
मिश्रा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से इन खदानों को हासिल करने में मदद मिलेगी और इससे HCL को लंबे समय तक खनन गतिविधियां चलाने का अवसर मिलेगा।
HCL में करीब 8,300 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 4,000 सिंहभूम क्षेत्र की खनन गतिविधियों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
कंपनी ने आने वाले वर्षों में पूंजीगत खर्च बढ़ाने की भी योजना बनाई है। HCL का कैपेक्स पिछले वर्ष करीब 425 करोड़ रुपये था, जिसे चालू वर्ष में बढ़ाकर करीब 750 करोड़ रुपये करने की योजना है। इसके बाद करीब 1,500 करोड़ और 2,200 करोड़ रुपये के कैपेक्स का लक्ष्य रखा गया है।
मिश्रा ने कहा कि HCL का लक्ष्य केवल मौजूदा खदानों का उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि अगले 25 से 30 वर्षों के लिए नए संसाधनों को विकसित करना भी है। सिंहभूम में खदानों को फिर से शुरू करने, नए ब्लॉकों को विकसित करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने से झारखंड में कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होगी।
