गंगा के जलस्तर में गिरावट के बावजूद लोगों की परेशानी कम नहीं हो रही है। गांधी घाट, मनेर व हाथीदह में बुधवार को गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ था, हालांकि शाम तक तीनों स्थानों पर जलस्तर घटने की प्रवृत्ति दिखी। गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान 48.60 मीटर से 75 सेंटीमीटर ऊपर 49.35 मीटर तो मनेर में लाल निशान से 13 सेंटीमीटर पार 52.13 मीटर पर रही।
हाथीदह में भी पानी 35 सेंटीमीटर ऊपर तो दीघा घाट पर खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर नीचे 50.34 मीटर जलस्तर रहा। गंगा में ऊफान का असर पटना सिटी में दिख रहा है।
आलमगंज क्षेत्र में भद्रघाट से महावीर घाट होते हुए कंगन घाट तक सड़क पर करीब डेढ़ से दो फीट पानी बह रहा है। सोमवार रात से महावीर घाट के पास सड़क पर गंगा का पानी पहुंचने लगा था। बुधवार को भद्रघाट तक इसका असर दिखा। सड़क पर घुटने से अधिक पानी और कीचड़ के बीच भी वाहनों का परिचालन जारी रहा। पानी में दोपहिया वाहनों के बंद होने और फिसलने से दुर्घटना का खतरा बना रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार मंगलवार को ही घाट की सीढ़ियों और गंगा मंदिर तक पानी पहुंच गया था।
प्रशासन ने सड़क पर बैरिकेडिंग कराई है। भद्रघाट मां गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार शर्मा ने बताया कि अचानक जलस्तर बढ़ने से स्नान और पूजा करने आने वालों को परेशानी हो रही है। प्रशासन की चेतावनी के बावजूद लोग उफनती गंगा में लोग स्नान करते दिखे।कच्ची दरगाह में राघोपुर से आने-जाने के लिए नावों पर क्षमता से अधिक लोग और सामान लदे दिखे। इनमें विद्यार्थी भी शामिल थे। स्थानीय स्तर पर नावों के परिचालन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी से हादसे का खतरा बना हुआ है।
