लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले ऑनलाइन फॉर्म 6 में विवादास्पद बदलाव करने का आदेश वास्तव में किसने दिया था, टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) को यह संशोधन लागू करने के लिए किसने कहा था और कंपनी के भीतर इसे किसने मंजूरी दी थी, साथ ही यह भी सवाल किया कि क्या टीसीएस पर ऐसा करने के लिए कोई दबाव डाला गया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से उन्होंने चुनाव आयुक्तों विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू द्वारा वैधानिक फॉर्म 6 में एक विशेष गहन संशोधन (SIR) से संबंधित घोषणा को जोड़े जाने पर दर्ज की गई आपत्तियों का हवाला दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अपने आयुक्तों द्वारा दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार ऑनलाइन फॉर्म 6 में अवैध रूप से बदलाव किया गया था, और जानना चाहा कि चुनाव आयोग में ऐसा करने का आदेश किसने दिया था। इस बीच, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने राहुल गांधी की पोस्ट को टैग करते हुए कहा कि जेन-जी मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा जुलाई 2026 के मध्य में असंवैधानिक रूप से फॉर्म 6 में बदलाव किए गए थे, और स्पष्ट रूप से यह कदम प्रधानमंत्री-गृहमंत्री की जोड़ी द्वारा सुनियोजित तरीके से उठाया गया था। विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन ने सभी जिला मुख्यालयों पर ‘संविधान बचाओ’ मार्च निकालने, भविष्य के सभी चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग करने और एसआईआर तथा चुनावी गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट से शीघ्र सुनवाई का आग्रह करने की घोषणा की है। उन्नीस राजनीतिक दलों के नेताओं की मैराथन बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे और मतदाता सूची संशोधन से जुड़ी कथित अनियमितताओं को उजागर करने के लिए राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे, जबकि विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उधर, द इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक पारा और चढ़ गया है, जिसमें खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ईसिनेट पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा पत्र को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों में कथित रूप से फेरबदल करने और मतदाताओं के नाम केंद्रीय स्तर पर जोड़ने, हटाने या बदलने की अनुमति देने वाले सॉफ्टवेयर के संबंध में चुनाव आयोग की आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना के खिलाफ संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराने के लिए औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज कराई है, जिससे इस पूरे विवाद ने एक नया और गंभीर राजनीतिक मोड़ ले लिया है।
