केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार दोपहर 2:15 बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि यह निर्णय छात्रों के हितों की रक्षा, राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने और मौजूदा स्थिति का किसी भी राष्ट्रविरोधी तत्व द्वारा दुरुपयोग रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
देश के युवाओं के नाम जारी दो पृष्ठों से अधिक लंबे सार्वजनिक पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने चार दशकों से अधिक समय छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के साथ कार्य किया है। उन्होंने दोहराया कि एक मजबूत, समावेशी और पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है।
अपने पत्र में उन्होंने 3 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी और परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया। साथ ही, अगले वर्ष से परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में आयोजित करने की घोषणा की, ताकि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि दो करोड़ नहीं, बल्कि 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल के दिनों में कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और पूरी प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा उनकी व्यक्तिगत छवि का नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य की सुरक्षा का है।
