बिहार सरकार ने राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए गंगा और गंडक नदियों के किनारे दो सौ बीस किलोमीटर लंबे तीन नए रिवरफ्रंट एक्सप्रेसवे बनाने की एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। चार लेन वाली इस अनूठी एक्सप्रेसवे परियोजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के प्रमुख जिलों को राष्ट्रीय परिवहन गलियारों (कॉरिडोर) से जोड़ना है, जिससे लखनऊ और दिल्ली जैसे बड़े वाणिज्यिक केंद्रों तक पहुंच काफी आसान और तेज हो जाएगी। बिहार राज्य सड़क विकास निगम (बीएसआरडीसी) ने इस विशाल परियोजना के लिए प्रारंभिक प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं, जिसमें विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करना, भूमि अधिग्रहण का अध्ययन और आवश्यक मंजूरियां हासिल करना शामिल है। पब्लिक-Private पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आधारित इस परियोजना से यात्रा के समय में भारी कमी आएगी।
रियल एस्टेट और निवेश के दृष्टिकोण से इस बुनियादी ढांचागत विकास को बिहार के संपत्ति बाजार के लिए एक ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है। इस योजना के तहत तीन प्रमुख कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे: पहला ‘विश्वामित्र पथ’, जो पटना के मनेर से बक्सर तक लगभग नब्बे किलोमीटर लंबा होगा और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा; दूसरा ‘गंगा अंबिका पथ’, जो बिदुपुर, सोनपुर और दिघवारा के बीच लगभग छप्पन किलोमीटर लंबा होगा और पटना महानगरीय क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधारेगा; और तीसरा ‘नारायणी पथ’, जो गंडक नदी के किनारे सोनपुर से गोपालगंज तक लगभग चौहत्तर किलोमीटर लंबा होगा और उत्तरी बिहार को ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जोड़ेगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन मार्गों के बनने से पटना, भोजपुर, बक्सर और गोपालगंज जैसे जिलों में आवासीय, व्यावसायिक और लॉजिस्टिक्स विकास के नए द्वार खुलेंगे, जिससे निवेशकों के लिए लंबी अवधि में भूमि की कीमतों में भारी उछाल और बेहतरीन रिटर्न मिलने की प्रबल संभावनाएं बन रही हैं।
