त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया और उन्नत हृदय चिकित्सा देखभाल का शानदार उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने इमरजेंसी रूम (ईआर) के भीतर अचानक कार्डियक अरेस्ट का शिकार हुए 58 वर्षीय व्यक्ति को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित कर स्थिर किया। इस गंभीर मामले का नेतृत्व डॉ. रोहित कुमार सेंगर, एचओडी – इमरजेंसी मेडिसिन और डॉ. रोहित कुमार, कंसल्टेंट – कार्डियोलॉजी ने किया, जिनकी त्वरित और समन्वित कार्रवाई ने कुछ ही मिनटों में मरीज की जान बचा ली। विश्व आपातकालीन चिकित्सा दिवस के अवसर पर यह सफल हस्तक्षेप अस्पताल की उन्नत आपातकालीन हृदय चिकित्सा सेवाओं और गंभीर परिस्थितियों में समय पर जीवनरक्षक उपचार प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मरीज बीआईटी मेसरा में अचानक बेहोश होकर गिर पड़े थे, जिसके बाद उन्हें गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया। शाम 4:36 बजे इमरजेंसी विभाग पहुंचने पर उनकी हृदय गति मात्र 37 बीट प्रति मिनट थी। कुछ ही क्षण बाद उनकी स्थिति और बिगड़ गई तथा ईआर के भीतर उन्हें कार्डियक अरेस्ट हो गया, जिससे उनकी हृदय गति शून्य हो गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इमरजेंसी टीम ने तुरंत पुनर्जीवन प्रक्रिया (रेससिटेशन) और इंट्यूबेशन शुरू किया, वहीं तत्काल हृदय हस्तक्षेप के लिए कैथ लैब को भी सक्रिय कर दिया गया। डॉ. रोहित कुमार की देखरेख में शाम 5:02 बजे, यानी अस्पताल पहुंचने के केवल 26 मिनट के भीतर, अस्थायी पेसमेकर प्रत्यारोपण (टेम्परेरी पेसमेकर इंसर्शन) सफलतापूर्वक किया गया, जिससे हृदय की धड़कन दोबारा शुरू हुई और मरीज की स्थिति स्थिर हो सकी। इस मामले पर बोलते हुए डॉ. रोहित कुमार सेंगर ने कहा, “यह बेहद गंभीर मामला था, जहां हर सेकंड महत्वपूर्ण था। मरीज को ईआर पहुंचने के कुछ ही समय बाद कार्डियक अरेस्ट हुआ और उनकी जान बचाने के लिए तत्काल समन्वित कार्रवाई आवश्यक थी। इमरजेंसी, कार्डियोलॉजी, कैथ लैब, नर्सिंग और सपोर्ट टीमों के बीच बेहतरीन तालमेल के कारण उन्नत उपचार बिना किसी देरी के शुरू किया जा सका। ऐसे मामले आपातकालीन चिकित्सा में तैयारी, त्वरित निर्णय और टीमवर्क के महत्व को दर्शाते हैं।”
आगे जानकारी देते हुए डॉ. रोहित कुमार ने कहा, “मरीज को अत्यधिक ब्रैडीकार्डिया (हृदय गति का अत्यंत धीमा होना) की स्थिति में लाया गया था और उनकी स्थिति तेजी से कार्डियक अरेस्ट में बदल गई, जिससे यह मामला काफी चुनौतीपूर्ण हो गया। हृदय की धड़कन को पुनः स्थापित करने और रक्त संचार बनाए रखने के लिए तत्काल अस्थायी पेसमेकर प्रत्यारोपण करना पड़ा। मरीज को 3–4 दिनों तक निगरानी में रखने और स्थिति स्थिर होने के बाद वेंटिलेटर हटा दिया गया। इसके बाद कैप्सूल के आकार का एक विशेष लीडलेस पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया, जिसके बाद अस्थायी पेसमेकर भी हटा दिया गया। मरीज ने अच्छी रिकवरी की और कुछ दिनों बाद पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।”
