पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह में छात्रों और शिक्षकों की उपस्थिति बिल्कुल भी अनिवार्य नहीं है। राज्य सरकार ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए साफ किया कि इस संबंध में जारी किए गए प्रशासनिक निर्देश केवल स्वैच्छिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए थे, न कि किसी प्रकार की बाध्यता पैदा करने के लिए। सरकार के इस आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि जब स्थिति पहले से ही साफ थी, तब इस प्रकार की कानूनी मुकदमेबाजी या जनहित याचिका दायर करने की कोई वास्तविक आवश्यकता ही नहीं थी।
इस कानूनी मामले पर सुनवाई के दौरान माननीय उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए रेखांकित किया कि योग एक स्वैच्छिक और स्वास्थ्य-केंद्रित गतिविधि है, जिसे किसी भी नागरिक पर जबरन लागू नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जारी सर्कुलर का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य जागरूकता और इस वैश्विक दिवस के महत्व को साझा करना था। सरकार के इस रुख से राज्य के शिक्षक संगठनों, छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है, जो पहले उपस्थिति की अनिवार्यता की आशंकाओं को लेकर असमंजस की स्थिति में थे। अदालत के इस अंतिम फैसले के बाद अब राज्य भर के शैक्षणिक संस्थानों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से जुड़े सभी उत्सव पूरी तरह से स्वैच्छिक और सहज माहौल में आयोजित किए जा सकेंगे।
