बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर करते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की है।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी नीरज कुमार को 19,000 से अधिक मतों के अंतर से शिकस्त देकर इस सीट पर भाजपा के तीन दशकों से चले आ रहे दबदबे को समाप्त कर दिया। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी।
किसी भी गठबंधन में शामिल होने से इनकार
अपनी पहली चुनावी सफलता के बाद प्रशांत किशोर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वह किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन के साथ नहीं जाएंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज बिहार की राजनीति में स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ेगा और उनका इकलौता गठबंधन राज्य की जनता के साथ है। उन्होंने कहा कि यह जीत उन्हें सभी वर्गों, जिनमें भाजपा, कांग्रेस और राजद से असंतुष्ट कार्यकर्ता शामिल हैं, का समर्थन मिलने से संभव हुई है। Gen Z आंदोलन और कम वोटिंग का जिक्र
चुनाव परिणाम आने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में प्रशांत किशोर ने माना कि हाल ही में युवाओं (Gen Z) द्वारा चलाए गए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों से बने माहौल ने चुनावी नतीजों को प्रभावित किया होगा।
हालांकि, उन्होंने 35 प्रतिशत से कम हुए मतदान पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसा कोई ठोस आंकड़ा नहीं है जो यह साबित करे कि युवाओं ने भारी संख्या में वोट डाले हैं। प्रशांत किशोर ने इस जनादेश को सीधे तौर पर बिहार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ जनता का आक्रोश करार दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला केंद्र सरकार और भाजपा नेतृत्व के लिए भी एक बड़ा सबक है।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
सीपीआई (एमएल) लिबरेशन पार्टी के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने इसे तानाशाही के खिलाफ जनता के मिजाज में बदलाव का बड़ा संकेत बताया।
कांग्रेस और आरजेडी दोनों ही दलों ने कहा कि बांकीपुर का यह फैसला सत्ता में बैठी भाजपा की नीतियों के प्रति जन-आक्रोश को दर्शाता है और आगामी चुनावों के लिए एक नया रुख तय करेगा।
वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि उन्होंने आज के युवा और छात्र आंदोलनों की तुलना 1974 के छात्र आंदोलन से करते हुए कहा कि मौजूदा दौर का युवा राजनीतिक रूप से बेहद सजग है।
