पकरैल पंचायत के प्राथमिक विद्यालय सुखदेव सुमन साह लेबा में मंगलवार को मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) खाते ही 25 छात्र-छात्राएं बीमार पड़ गए। सड़ा चावल और कीड़े युक्त सोयाबीन परोसने का आरोप लगते ही स्कूल में हंगामा खड़ा हो गया। गुस्साए अभिभावकों ने स्कूल पहुंचकर जमकर बवाल काटा और बीमार बच्चों को आनन-फानन में अनुमंडलीय अस्पताल गोगरी पहुंचाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, विद्याखगड़िया में मिड-डे मील से हाहाकार: ‘कीड़े’ वाला खाना खाने से 25 बच्चे बीमार, स्कूल में कटा बवाललय में कुल 140 बच्चे नामांकित हैं, जबकि मंगलवार को करीब 75 बच्चे उपस्थित थे। दोपहर में एमडीएम परोसा गया तो थाली में घटिया चावल और पुराना, पिल्लू लगा सोयाबीन देखकर बच्चे सहम गए। कुछ बच्चे खाने से परहेज कर लिया फिर भी कुछ बच्चों ने खाना शुरू किया तो कुछ ही मिनटों में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। बच्चों को चक्कर आने लगे, उल्टी होने लगी और कई बच्चे बेहोश होने लगे। यह देख स्कूल में अफरा-तफरी मच गई।
सूचना आग की तरह फैली तो सैकड़ों की संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंच गए। लोगों ने स्कूल में हंगामा शुरू कर दिया। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में न तो पढ़ाई ठीक से होती है और न ही एमडीएम की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाता है। शिकायत करने पर उल्टा डांटकर भगा दिया जाता है। आज उसी लापरवाही का नतीजा है कि 25 बच्चे अस्पताल में हैं। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। गोगरी एसडीओ संजय कुमार, बीडीओ रघुनंदन आनंद आनंद अनुमंडलीय अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. चंद्र प्रकाश, साइबर डीएसपी निशांत गौरव, गोगरी के प्रभारी डीएसपी, महेशखूंट थानाध्यक्ष मिथिलेश कुमार, गोगरी एमडीएम प्रभारी कुंदन कुमार, जिला एमडीएम प्रभारी व शिक्षा विभाग के कई अधिकारी मौके पर पहुंचे।
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई। आरोप है कि घटना के तुरंत बाद प्रधानाध्यापिका रिजवाना यासमीन ने आनन-फानन में बचा हुआ भोजन दूर फिंकवा दिया। सभी थालियों को धुलवाकर जूठन तक साफ करा दिया, ताकि कोई सबूत न बचे। अधिकारियों ने इस पर प्रधानाध्यापिका को कड़ी फटकार लगाई। एसडीओ ने सवाल उठाया कि आखिर आपने सबूत क्यों मिटाए?
अनुमंडलीय अस्पताल गोगरी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. चंद्र प्रकाश ने बताया कि सूचना मिलते ही मेडिकल टीम के साथ लेबा गए थे। कुल 25 बच्चे बीमार मिले जिन्हें अस्पताल लाया गया। सभी बच्चों का इलाज चल रहा है और फिलहाल सभी खतरे से बाहर हैं। मंगलवार को अधिकतम तापमान भी 30 डिग्री से कम था, ऐसे में भोजन जल्दी खराब होने का सवाल ही नहीं उठता।
पदाधिकारियों ने आक्रोशित ग्रामीणों को किसी तरह समझा-बुझाकर शांत कराया। अधिकारियों की टीम ने स्कूल के रसोई घर, भंडारण और उपस्थिति पंजी की जांच की। जांच के बाद नाराज होकर पदाधिकारी लौट गए।
अब ग्रामीणों को इंतजार है कि बच्चों की जान से खिलवाड़ करने वाले प्रधानाध्यापक और दोषी शिक्षकों पर क्या कार्रवाई होती है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे।
