एम्स पटना ने लिवर प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान में पहली बार लाइव डोनर यानी जीवित दाता से लिवर ट्रांसप्लांट किया गया है। इस सफलता के साथ एम्स पटना में लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
बीते शुक्रवार को गैस्ट्रो सर्जरी विभाग की टीम ने करीब 18 घंटे तक चली जटिल प्रक्रिया के बाद लिवर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह ट्रांसप्लांट दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल की टीम के निर्देशन में किया गया।
एम्स पटना में लाइव डोनर से लिवर ट्रांसप्लांट शुरू करने को लेकर लंबे समय से तैयारियां चल रही थीं। अब पहली बार जीवित दाता से सफल प्रत्यारोपण के बाद गंभीर लिवर रोग से जूझ रहे मरीजों के इलाज के विकल्प और बेहतर होने की उम्मीद है।
हालांकि, मरीज और डोनर की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को लेकर एम्स पटना की ओर से फिलहाल विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। संस्थान की ओर से 17 अगस्त को इस उपलब्धि के संबंध में विस्तार से जानकारी देने की बात कही गई है। इस दौरान ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया, मरीज और डोनर की स्थिति के साथ पूरी टीम की भूमिका के बारे में जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
इससे पहले सितंबर 2025 में एम्स पटना में कैडेवर डोनर से लिवर ट्रांसप्लांट किया गया था। यह प्रत्यारोपण दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल के प्रसिद्ध लिवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ प्रो. सुभाष गुप्ता की टीम और एम्स पटना के गैस्ट्रो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. उत्पल आनंद की टीम ने मिलकर किया था। उस मरीज की स्थिति बेहतर बताई जा रही है।
लाइव डोनर लिवर ट्रांसप्लांट एक जटिल चिकित्सा प्रक्रिया होती है, जिसमें मरीज के साथ-साथ डोनर की भी सर्जरी की जाती है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया के दौरान सर्जरी, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर और अन्य विशेषज्ञ टीमों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी होता है। एम्स पटना में इस सफल प्रत्यारोपण को संस्थान के लिए महत्वपूर्ण चिकित्सा उपलब्धि माना जा रहा है।
