November 3, 2026
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पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए झाड़ग्राम में टाइगर सफारी पार्क बनाया जाएगा। उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित बंगाल सफारी पार्क के बाद यह राज्य का दूसरा टाइगर सफारी पार्क होगा। राज्य सरकार ने अपने पहले बजट में इस परियोजना के लिए 25 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
झाड़ग्राम शहर के बाहरी इलाके में जंगलमहल जूलॉजिकल पार्क के सामने 262 एकड़ में फैले शाल वन में इस सफारी पार्क का निर्माण किया जाएगा। राज्य के वन मंत्री ने हाल ही में घोषणा की है कि आगामी अंग्रेजी नववर्ष में सिलीगुड़ी के बंगाल सफारी पार्क से पांच बाघ झाड़ग्राम लाए जाएंगे। इसके साथ ही यहां टाइगर सफारी शुरू करने की तैयारी है।
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित सफारी पार्क के लिए जमीन हस्तांतरित की जा चुकी है और परियोजना का प्रस्ताव भी तैयार कर भेज दिया गया है। जल्द ही निविदा प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। बाघों की सुरक्षा के लिए पूरे जंगल के चारों ओर ऊंची चारदीवारी बनाई जाएगी। इसके ऊपर बैटरी से चलने वाली विशेष विद्युत बाड़ लगाई जाएगी, ताकि बाघ सुरक्षित क्षेत्र के भीतर रह सकें।
पर्यटकों को बाघों को करीब से देखने का अवसर देने के लिए जंगल के अंदर जालीदार छत वाले गोलाकार रास्ते बनाए जाएंगे। इन रास्तों पर चलते हुए पर्यटक बाघों को देख सकेंगे। इसके अलावा सफारी के लिए विशेष वाहनों की भी व्यवस्था की जाएगी।
वन विभाग के अनुसार, शुरुआती चरण में बाघों को रखने के लिए जंगलमहल जूलॉजिकल पार्क में भी व्यवस्था की गई है। वहां एक नया बाड़ा बनाया गया है, जिसमें चार बाघों को रखा जा सकता है। पहले चरण में बाघों को इसी बाड़े में रखा जाएगा। बाद में टाइगर सफारी का निर्माण पूरा होने पर उन्हें खुले जंगल में विचरण के लिए छोड़ा जाएगा।
झाड़ग्राम के शाल वन और लाल मिट्टी वाले इलाके की जलवायु बाघों के अनुकूल होगी या नहीं, इस सवाल पर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगलमहल जूलॉजिकल पार्क में पहले भी वन्यजीवों को रखने और उनके प्रजनन में सफलता मिली है। वर्ष 2018 में उत्तर बंगाल से यहां लाए गए तेंदुओं की संख्या बंद बाड़े में प्रजनन के जरिए बढ़ी थी। बाद में कुछ तेंदुओं को उत्तर बंगाल भेजा गया।
उल्लेखनीय है कि झाड़ग्राम के जंगलों में पहले भी बाघों की मौजूदगी सामने आ चुकी है। एक बाघ करीब एक महीने तक लालगढ़ के जंगल में रहा था, लेकिन बाद में आदिवासियों के शिकार उत्सव के दौरान उसकी मौत हो गई थी। वर्ष 2024 में ओडिशा से निकली जीनत नाम की बाघिन झारखंड होते हुए झाड़ग्राम के बेलपहाड़ी पहुंची थी। बाद में पुरुलिया के रास्ते वह बांकुड़ा में पकड़ी गई और उसे कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर ले जाया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे वापस ओडिशा भेज दिया गया था।

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