November 3, 2026
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर दोबारा हमला किया तो इस बार कोई भी सीमा या ‘रेड लाइन’ लागू नहीं होगी। उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं देश और उसके नागरिकों पर हमला करने वालों को करारा जवाब देने में सक्षम हैं।

ईरान सरकार की अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क प्रेस टीवी के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्री ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट के जरिए जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ पर निशाना साधा। उन्होंने मर्ज़ की उन पुरानी टिप्पणियों का जिक्र किया, जिनमें उन्होंने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों का समर्थन किया था।

अराघची ने लिखा, “पिछले साल जब इज़राइल और अमेरिका ने ईरान पर बमबारी शुरू की थी, तब मर्ज़ ने इसका स्वागत किया था। उन्होंने इसे यूरोप का गंदा काम करने जैसा बताया था।”

उन्हाेंने आगे कहा कि ऊर्जा संकट के कारण यूरोप को हुआ 100 अरब यूरो से अधिक का आर्थिक नुकसान उस जवाबी कार्रवाई के सामने कुछ भी नहीं है, जो ईरान की सशस्त्र सेनाएं अपने देश और नागरिकों को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कर सकती हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “रेड लाइन अब पुरानी बात हो चुकी है।”

अराघची की यह प्रतिक्रिया जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के शुक्रवार को दिए गए बयान के बाद आई है। दक्षिण कोरिया यात्रा के समापन पर मर्ज़ ने कहा था कि मौजूदा संघर्ष का समाधान सैन्य कार्रवाई से संभव नहीं है। उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए युद्ध समाप्त करने की अपील की थी।

जर्मन चांसलर ने कहा कि जर्मनी संघर्ष समाप्त कराने के लिए अपने कूटनीतिक प्रयास तेज कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे यूरोप के कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर 100 अरब यूरो से अधिक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। उनके मुताबिक, युद्ध को जल्द समाप्त करना यूरोप के आर्थिक हित में भी है।

ईरान के अनुसार, जून 2025 में अमेरिका और इज़राइल ने उसके खिलाफ पहला बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया था, जो 12 दिनों तक चला। इसके बाद 28 फरवरी, 2026 को दूसरा सैन्य संघर्ष शुरू हुआ, जो अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम के साथ रुका। इन घटनाओं के दौरान ईरान ने जवाबी सैन्य कार्रवाई की और क्षेत्र में अमेरिकी तथा इज़राइली हितों को निशाना बनाया। तेहरान का दावा है कि उसकी जवाबी कार्रवाई ने विरोधी पक्षों को युद्धविराम स्वीकार करने के लिए मजबूर किया।

इस संघर्ष में होर्मुज जलडमरूमध्य भी महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दा बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। ईरान ने इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत बनाए रखने की बात कही है। ईरान ने यह भी आरोप लगाया है कि अमेरिका की ओर से की गई सैन्य कार्रवाई और नौसैनिक नाकेबंदी ने पहले हुए समझौतों का उल्लंघन किया। इसके जवाब में ईरानी सशस्त्र बलों ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की।

फिलहाल, ईरान की ओर से दी गई ताजा चेतावनी ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है। ऐसे में क्षेत्र में शांति बहाली के लिए कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

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