टाटा स्टील में लंबित ग्रेड रिवीजन समझौते को लेकर कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज है। विशेषकर ओल्ड सीरीज ग्रेड के कर्मचारियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नया वेतन समझौता किस स्वरूप में होता है और क्या वर्ष 2019 के समझौते में उत्पन्न हुई विसंगतियों को दूर किया जा सकेगा। कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि आगामी समझौता केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुराने कर्मचारियों के आर्थिक हितों और भविष्य की पेंशन व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
पिछले ग्रेड रिवीजन समझौते
टाटा स्टील में राष्ट्रीय संयुक्त परामर्श समिति (एनजेसीएस) की तर्ज पर हुए ग्रेड रिवीजन समझौतों पर नजर डालें तो वर्ष 1997 से दिसंबर 2006 तक लागू समझौते में कर्मचारियों को 20 प्रतिशत मिनिमम गारंटीड बेनिफिट (एमजीबी) दिया गया था। इसके बाद 1 जनवरी 2007 से वर्ष 2012 तक पांच वर्षों के लिए हुए समझौते में 21 प्रतिशत एमजीबी निर्धारित किया गया। वर्ष 2012 से 2018 तक छह वर्षों के लिए हुए वेतन समझौते में 18.25 प्रतिशत एमजीबी मिला। वहीं सितंबर 2019 में हुए सात वर्षीय ग्रेड रिवीजन समझौते में 12.75 प्रतिशत एमजीबी पर सहमति बनी, जिसे लेकर उस समय से ही कर्मचारियों के एक वर्ग द्वारा सवाल उठाए जाते रहे हैं।
डीए फ्रीज होने से बढ़ी नाराजगी
वर्ष 2019 के समझौते की सबसे बड़ी विसंगति महंगाई भत्ता (डीए) फ्रीज किए जाने को माना जाता है। समझौते के तहत ओल्ड ग्रेड के कर्मचारियों के डीए को अपर सीलिंग 83,365 रुपये पर स्थिर कर दिया गया।31 दिसंबर 2024 को डीए फ्रीज होने के बाद इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आया। कर्मचारियों के अनुसार जिन कर्मियों का मूल वेतन (बेसिक) लगभग 1.25 लाख रुपये था, उन्हें प्रतिमाह करीब 18,319 रुपये तक का नुकसान होने लगा। इससे ओल्ड ग्रेड के कर्मचारियों की आय वृद्धि रुक गई और वे प्रभावी रूप से एक वेतन समझौता पीछे चले गए। कर्मचारियों का मानना है कि यदि आगामी ग्रेड रिवीजन में लगभग 14.6 प्रतिशत एमजीबी के आसपास समझौता होता है तो ग्रेड संरचना में उत्पन्न इस नुकसान की आंशिक या पूर्ण भरपाई संभव हो सकती है।
सैलरी फैक्टर बना चर्चा का विषय
ग्रेड रिवीजन की चर्चाओं के बीच सैलरी फैक्टर भी कर्मचारियों के बीच बहस का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। पूर्व अध्यक्ष पी.एन. सिंह के कार्यकाल में सैलरी फैक्टर लगभग 1.85 रहा था। इसके बाद वर्ष 2019 में तत्कालीन अध्यक्ष आर. रवि प्रसाद के नेतृत्व में हुए समझौते में डीए फ्रीज व्यवस्था के साथ यह फैक्टर करीब 1.63 तक पहुंचा। वर्तमान चर्चाओं के अनुसार यदि 11 प्रतिशत एमजीबी पर समझौता होता है तो सैलरी फैक्टर लगभग 1.60 रहने की संभावना है, जबकि 12 प्रतिशत एमजीबी की स्थिति में यह करीब 1.62 तक पहुंच सकता है।
पहली बार अलग-अलग होगा ओल्ड ग्रेड का सैलरी फैक्टर
कर्मचारी सूत्रों के अनुसार नए वेतन समझौते के बाद टाटा स्टील के इतिहास में पहली बार ओल्ड सीरीज ग्रेड के कर्मचारियों का सैलरी फैक्टर एक समान नहीं रहेगा। बताया जा रहा है कि यह फैक्टर अधिकतम 1.62 से शुरू होकर घटते क्रम में लगभग 1.30 तक जा सकता है। इसका प्रमुख कारण डीए फ्रीज की व्यवस्था है, जिसने विभिन्न ग्रेड और वेतन स्तर के कर्मचारियों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे समान ग्रेड के कर्मचारियों के बीच भी वेतन वृद्धि का अंतर बढ़ सकता है, जो भविष्य में नई जटिलताओं को जन्म दे सकता है।
हायर पेंशन योजना पर भी असर
डीए फ्रीज का प्रभाव केवल वर्तमान वेतन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जिन कर्मचारियों ने कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत हायर पेंशन का विकल्प चुना है, उन पर भी इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। कर्मचारियों का तर्क है कि अंतिम वेतन और वेतन संरचना में होने वाले बदलाव का सीधा असर पेंशन गणना पर पड़ता है। ऐसे में वर्तमान वेतन संरचना में हुई किसी भी कमी का प्रभाव सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन पर भी दिखाई दे सकता है।
यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी से कर्मचारियों को बड़ी उम्मीद
टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू चौधरी लगातार दो बार अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए हैं। कर्मचारियों के एक वर्ग का मानना है कि वर्ष 2019 के वेतन समझौते में सामने आई विसंगतियों के विरोध ने उनकी लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पहली बार कर्मचारियों ने उन्हें इस उम्मीद के साथ नेतृत्व सौंपा था कि वे पुराने समझौते की कमियों को दूर करने का प्रयास करेंगे। दूसरी बार उन्हें निर्विरोध चुने जाने के पीछे भी कर्मचारियों की यही अपेक्षा बताई जाती है कि वे ऐसा ग्रेड रिवीजन कराएं जो पूर्व अध्यक्ष पी.एन. सिंह के कार्यकाल की तरह कर्मचारियों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो। वर्तमान में लंबित ग्रेड रिवीजन समझौते को लेकर कर्मचारियों की निगाहें यूनियन और प्रबंधन के बीच चल रही वार्ताओं पर टिकी हुई हैं। कर्मचारियों का मानना है कि ओल्ड ग्रेड कर्मचारियों से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने तथा वेतन संरचना में संतुलन स्थापित करने के लिए मौजूदा नेतृत्व के पास यह एक महत्वपूर्ण और संभवतः अंतिम अवसर है। ऐसे में आगामी समझौता केवल वेतन वृद्धि का दस्तावेज नहीं, बल्कि कर्मचारियों की वर्षों पुरानी अपेक्षाओं और असंतोष का समाधान भी साबित हो सकता है।
