टाटा स्टील के एन एस ग्रेड के कर्मचारी इस बार बेहतर ग्रेड रिवीजन की उम्मीद लगाए हुए हैं क्योंकि पिछली बार जो ग्रेड रिवीजन हुआ था उसमें प्रत्येक कर्मचारी को कम से कम 6500 रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।ম ऐसे में बेहतर ग्रेड रिवीजन नहीं होने पर कहीं उनकी उम्मीद पर पानी फिरता है तो उनका ‘अपना घर’ का ‘सपना’ ही रह जाएगा. उनके स्वास्थ्य व्यवस्था भी टीएमएच के भरोसे रहेगी. कहीं किसी बेहतर इलाज करने के लिए बाहर जाते हैं तो उनकी स्वास्थ्य व्यवस्था भी बेहाल रहेगी. बेहतर ग्रेड रिवीजन नहीं होने से उनके बच्चों की भी उच्च शिक्षा पर आर्थिक मार पड़ेगी। ऐसे में यूनियन नेतृत्व पर पूरा दबाव है कि वह किसी भी हाल में एन एस ग्रेड कर्मचारियों का बेहतर ग्रेड रिवीजन करायें , उनके भविष्य को देखकर चलें जिससे उनका भविष्य संवर सके. यदि पिछले ग्रेड रिवीजन को देखा जाए तो एन एस ग्रेड के प्रत्येक कर्मचारी को कम से कम 6500 का नुकसान झेलना पड़ रहा है डीए शून्य वाले एन एस ग्रेड कर्मचारियों पर नजर डालें तो आगस्त, 2024 में ज्वाइन करने वाले एनएस 7 के कर्मचारियों को करीब 15000 रुयये के आस पास नुकसान हो रहा है। ऐसे में में उनकी मनोदशा खराब चल रही है जिस कारण वह लगातार यूनियन नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं कि उन लोगों का बेहतर ग्रेड रिवीजन हो। क्योंकि इस ग्रेड रिवीजन के बाद बढ़ी हुई राशि में ही उन्हें अगले 7 वर्षों तक इंतजार करना पड़ेगा. कुछ एन एस ग्रेड के कर्मचारी अपनी सेवानिवृत्ति की कगार पर खड़े रहेंगे। क्योंकि 2011 में टाटा स्टील में एन एस ग्रेड बना था।
कुछ ऐसे कर्मचारी हैं जो की 35 से 40 वर्ष की उम्र में ज्वाइन किए थे ऐसे में 2032 तक वे सेवानिवृत्ति के आसपास पहुंच जाएंगे, जहां तक रही राशि की बात तो पिछले ग्रेड रिवीजन समझौता में ही एन एस ग्रेड को अधिक फायदा नहीं पहुंचा था. एक तरह से माना जाए तो उन्हें कुछ ना कुछ नुकसान ही झेलना पड़ा था. ऐसे में अब यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी व टीम पर दबाव है कि वे किस तरह से एन एस ग्रेड के कर्मचारियों को आर्थिक तंगी से निकाल कर बेहतर स्थिति में खड़ा कर सकते।
2019 के समझौते में ही रहीं विसंगतियां
टाटा स्टील के एन एस ग्रेड के कर्मचारियों का कहना है कि सितंबर 2019 में हुए ग्रेड रिवीजन समझौता के दौरान कर्मचारियों के पे-स्केल में मिनिमम गारंटीड बेनिफिट (एमजीबी) को शामिल नहीं किया गया जिससे कर्मचारियों को बेसिक वेतन, वार्षिक इंक्रीमेंट व भविष्य की आय में लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है. कमेटी सदस्यों का कहना है कि एमजीबी को ग्रेड स्ट्रक्चर में नहीं जोडऩे के कारण एनएस-1 ग्रेड के कर्मचारियों को वार्षिक इंक्रीमेंट में करीब 100 रुपये व एनएस-12 ग्रेड के कर्मचारियों को करीब 210 रुपये प्रति वर्ष तक का नुकसान हुआ है. उनका कहना है कि वहीं बेसिक वेतन में यह अंतर 770 रुपये से लेकर 1,470 रुपये तक पहुंच चुका है. जोकी मिलने वाले रूत्रक्च का बड़ा हिस्सा इसके भरपायी में चला जाएगा।
