सिलीगुड़ी के होटल व्यवसायियों और उत्तर बंगाल के पर्यटन हितधारकों ने भारत सरकार द्वारा बांग्लादेशी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा सेवाएं फिर से बहाल करने के फैसले का पुरजोर स्वागत किया है. बांग्लादेश में नवनियुक्त भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने घोषणा की कि २८ जून २०२६ से ढाका समेत पांच प्रमुख वीजा केंद्रों पर पर्यटक वीजा के आवेदन आधिकारिक रूप से फिर से शुरू हो रहे हैं. ग्रेटर सिलीगुड़ी होटलियर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संयुक्त सचिव उज्ज्वल घोष और अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि इस सकारात्मक कदम से सीमा पार पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, होटलों में कमरों की बुकिंग बढ़ेगी और सिलीगुड़ी सहित पूरे उत्तर बंगाल के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को एक नया जीवन मिलेगा. जलपाईगुड़ी के फूलबाड़ी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी) के माध्यम से भारत पहुँचने वाले बांग्लादेशी नागरिकों ने भी इस फैसले पर गहरी खुशी जताई, क्योंकि इससे न केवल पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे बल्कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच यात्रा भी बेहद सुलभ हो जाएगी.
गौरतलब है कि साल २०२४ में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक घटनाक्रम, शेख हसीना सरकार के तख्तापलट और वहां के कुछ वर्गों में भारत विरोधी बयानों व भारतीय ध्वज के अनादर के विरोध में सिलीगुड़ी के होटल संघ ने ९ दिसंबर २०२४ से बांग्लादेशी नागरिकों को कमरे देने पर पूरी तरह रोक लगा दी थी. बाद में लोकतांत्रिक रूप से नई सरकार के गठन के बाद २३ फरवरी २०२६ को मतदान प्रक्रिया के जरिए इस प्रतिबंध को वापस लिया गया था. सामान्य दिनों में कूचबिहार के चांगराबंधा लैंड पोर्ट और जलपाईगुड़ी के फूलबाड़ी आईसीपी के रास्ते हर महीने लगभग ४०,००० से ४५,००० बांग्लादेशी नागरिक पर्यटन, चिकित्सा और उच्च शिक्षा के लिए सिलीगुड़ी आते थे, जो प्रतिबंधों के बाद घटकर नाममात्र रह गए थे, जिससे होटल व्यवसाय को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा था. पर्यटन संघों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए मांग की है कि न्यू जलपाईगुड़ी और ढाका छावनी के बीच चलने वाली ‘मिताली एक्सप्रेस’ ट्रेन सेवा को भी जल्द से जल्द दोबारा शुरू किया जाए ताकि दोनों देशों के बीच आपसी और व्यावसायिक रिश्ते और मजबूत हो सकें.
