August 14, 2026
image - 2026-08-13T145716.666

नोएल टाटा ने लंबे समय तक टाटा समूह में अपेक्षाकृत लो-प्रोफाइल भूमिका निभाने के बाद अब एक प्रमुख शक्ति केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। 2012 में जब रतन टाटा ने टाटा संस के चेयरमैन पद से सेवानिवृत्त होने का फैसला किया, तब नोएल टाटा का नाम संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर चर्चा में था, लेकिन अंततः साइरस मिस्त्री को यह जिम्मेदारी मिली। 2016 में मिस्त्री को अचानक पद से हटाए जाने के बाद एक बार फिर नोएल टाटा के नाम पर अटकलें लगीं, मगर इस बार भी उन्हें दरकिनार कर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के तत्कालीन एमडी और सीईओ एन. चंद्रशेखरन को टाटा संस की कमान सौंपी गई। दो महत्वपूर्ण मौकों पर नेतृत्व की दौड़ से बाहर रहने के बावजूद नोएल टाटा का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ता रहा। 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन बनाया गया, जो टाटा संस का प्रमुख शेयरधारक है। इस नियुक्ति ने समूह के रणनीतिक और स्वामित्व ढांचे में उनकी भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया। 69 वर्षीय नोएल टाटा का सफर बताता है कि टाटा समूह में प्रभाव केवल शीर्ष कार्यकारी पद संभालने से नहीं, बल्कि ट्रस्ट्स और स्वामित्व संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने से भी हासिल किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *