July 15, 2026
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पश्चिम बंगाल में असामाजिक गतिविधियों और संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से बंगाल सरकार का नया ‘वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी सोशल एक्टिविटीज अधिनियम, 2026’ ( गुंडा नियंत्रण कानून) सोमवार से पूरे राज्य में लागू हो गया। राज्य सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा अपराधियों में कानून का भय पैदा करने के लिए यह कदम उठाया गया है। वहीं, विपक्षी दलों ने इस कानून के दुरुपयोग की आशंका जताई है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को बारुईपुर दौरे के दौरान इस कानून के लागू होने की घोषणा की थी। राज्य सचिवालय के अनुसार, नए कानून के लागू होने से पुलिस और स्थानीय प्रशासन को संगठित अपराध तथा समाजविरोधी गतिविधियों के खिलाफ व्यापक अधिकार मिलेंगे।

इस कानून का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान निवारक हिरासत है। यदि प्रशासन को यह आशंका होती है कि कोई व्यक्ति सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है या किसी गंभीर समाजविरोधी अपराध की साजिश रच रहा है, तो अपराध होने से पहले भी उसे बिना मुकदमे अधिकतम एक वर्ष तक हिरासत में रखा जा सकेगा। कानूनी जानकारों का एक वर्ग इसे केंद्र के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के समान कठोर व्यवस्था मान रहा है।

कानून के तहत जिला बदर करने का भी अधिकार दिया गया है। यदि जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त या पुलिस उपमहानिरीक्षक स्तर के अधिकारी यह संतुष्ट होते हैं कि किसी कुख्यात अपराधी की किसी क्षेत्र में मौजूदगी से शांति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, तो उसे अधिकतम एक वर्ष के लिए उस क्षेत्र या पूरे जिले से बाहर रहने का आदेश दिया जा सकेगा।

नए कानून में इसके दायरे में आने वाले सभी अपराधों को गैर-जमानती बनाया गया है। ऐसे मामलों में पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकेगी और आरोपितों के लिए जमानत प्राप्त करना कठिन होगा। इसके साथ ही यदि किसी व्यक्ति ने समाजविरोधी गतिविधियों या संगठित अपराध के माध्यम से संपत्ति या धन अर्जित किया है, तो प्रशासन को उसे जब्त करने का भी अधिकार होगा।

कानून में समाजविरोधी गतिविधियों की परिभाषा को भी व्यापक बनाया गया है। इसमें सिंडिकेट संचालन, रंगदारी वसूली, बलपूर्वक जमीन या मकान पर कब्जा, नदियों से अवैध बालू खनन, अवैध खनन कारोबार, लोगों में भय का माहौल बनाकर व्यापार या सामान्य जीवन प्रभावित करना, बड़े साइबर अपराध तथा वित्तीय धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है।

सरकार ने सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाली हिंसक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ‘वेस्ट बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ भी लागू किया है। इसके तहत एक विशेष दावा आयोग का गठन किया जाएगा, जो दंगे, हिंसक प्रदर्शन या तोड़फोड़ से हुई क्षति का आकलन कर आरोपितों से उसकी भरपाई कराएगा।

विधानसभा में विधेयक पारित होने के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के दौरान कई स्थानों पर पुलिस थानों, रेलवे स्टेशनों और सरकारी बसों को नुकसान पहुंचाया गया था, लेकिन उस समय प्रभावी कानूनी व्यवस्था नहीं होने के कारण दोषियों से क्षतिपूर्ति नहीं कराई जा सकी। उन्होंने कहा था कि नया कानून भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से आर्थिक क्षति की वसूली सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है।

हालांकि, विपक्ष ने कानून की कठोर धाराओं पर सवाल उठाते हुए आशंका व्यक्त की है कि इसका दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों या असहमति जताने वाले लोगों के खिलाफ किया जा सकता है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का दावा है कि यह कानून केवल संगठित अपराध और गंभीर समाजविरोधी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बनाया गया है।

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