बिहार में आयोजित नीट पुनरीक्षा में सामने आए हाई-प्रोफाइल मामले की कमान अब राज्य सरकार के निर्देश पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने अपने हाथों में ले ली है। लखीसराय में दर्ज तीनों कांडों की तकनीकी जांच करते हुए ईओयू इस महा-घोटाले की परतों को खंगालने में जुट गई है। आधिकारिक खुलासे के अनुसार, इस पूरे रैकेट में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ ‘मुन्नाभाई’ की पहचान को लेकर आया है। लखीसराय के परीक्षा केंद्र से जिस फर्जी स्टाफ को पीएमसीएच (PMCH) के चौथे वर्ष का छात्र ‘मयंक कश्यप’ समझकर गिरफ्तार किया गया था, उसका असली नाम ‘अश्विनी कुमार’ है। वह पीएमसीएच के वर्ष 2022 बैच का छात्र है, जिसने कॉलेज प्रशासन और पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए बकायदा फर्जी नाम का इस्तेमाल किया था और उसका रोल नंबर 139 है। जांच में यह बेहद गंभीर बात सामने आई है कि परीक्षा का सुरक्षा जिम्मा संभालने वाली बायोमेट्रिक एजेंसी ‘साई एजुकेयर’ के कर्मियों ने परीक्षा माफियाओं के साथ सांठगांठ कर पूरी साजिश रची थी। इन कर्मियों की जिम्मेदारी अभ्यर्थियों के अंगुलियों के निशान और आइरिस आदि का सत्यापन करने की थी, लेकिन उन्होंने बिना सत्यापन किए ही डमी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर अवैध प्रवेश करा दिया। इस मामले में पुलिस ने बायोमेट्रिक कंपनी के कई सुपरवाइजर्स सहित 14 कर्मियों को दबोचा है। इसके अलावा, डमी अभ्यर्थी के रूप में देश के नामचीन संस्थानों के 9 मेडिकल छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एम्स रायबरेली का छात्र सौरभ जा, दिल्ली यूनिवर्सिटी का एमबीबीएस इंटर्न अमन अग्रवाल, और झारखंड के गिरिडीह व पलामू की दो मेडिकल छात्राएं भी शामिल हैं।
पीएमसीएच प्रशासन के ढीले रवैये और हॉस्टल प्रबंधन की एक और बड़ी लापरवाही इस जांच के दौरान पूरी तरह उजागर हुई है। की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी अश्विनी कुमार को कॉलेज के जीवक हॉस्टल में सीट आवंटित की गई थी, लेकिन वह हॉस्टल में न रहकर बाहर फ्लैट लेकर रह रहा था, जिसकी जानकारी कॉलेज प्रशासन या वार्डन स्तर पर किसी को नहीं थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि नीट पुनरीक्षा के दिन कॉलेज में आयोजित अनिवार्य सेमिनार में भी अश्विनी कुमार की उपस्थिति दर्ज पाई गई है। सूत्रों के मुताबिक, सर्जरी विभाग की ओपीडी क्लास में भी उसकी फर्जी उपस्थिति दिखाई गई थी। स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर प्राचार्य डॉ. एन. पी. सिंह ने सभी विभागों से छात्रों की सूची मांगी है और इस गंभीर ‘फर्जी उपस्थिति’ कांड की आंतरिक जांच के आदेश दे दिए हैं।
