बिहार के पटना में स्थित पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के किचन बॉय यानी रसोई सहायक के रूप में काम करने वाले अठारह वर्षीय पीयूष राज ने अपनी गरीबी और तंगहाली को पीछे छोड़ते हुए एक अद्भुत इतिहास रच दिया है। पीयूष ने हाल ही में आयोजित एशियाई युवा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए चार गुणा चार सौ मीटर मिक्स्ड रिले रेस में कांस्य पदक जीता है। वह पिछले कुछ वर्षों से पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के किचन में रसोइयों की मदद करने और बर्तन धोने का काम करते थे, ताकि उन्हें परिसर में रहने और ट्रैक पर अभ्यास करने की जगह मिल सके। उनके पिता एक दिहाड़ी मजदूर हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि पीयूष के पास शुरुआत में दौड़ने के लिए जूते और सही डाइट तक के पैसे नहीं थे।
पीयूष की इस असाधारण प्रतिभा को सबसे पहले स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के कोचों ने पहचाना, जिन्होंने उनकी लगन को देखते हुए उन्हें मुफ्त में प्रशिक्षण देना शुरू किया। दिन में किचन का काम करने के बाद पीयूष सुबह और शाम को ट्रैक पर कड़ा अभ्यास करते थे, जिसका परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने पदक के रूप में आया है। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवींद्रन शंकरण ने गहरी खुशी व्यक्त की है। उन्होंने घोषणा की है कि खेल प्राधिकरण पीयूष राज को वित्तीय सहायता के रूप में पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार देगा और आगे की विश्व स्तरीय ट्रेनिंग के लिए उनके सभी खर्चों को खुद वहन करेगा ताकि वे भविष्य में देश के लिए ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर पदक जीत सकें।
