वित्त विभाग का दायित्व संभाल रहे उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बिहार के बैंकों के प्रदर्शन के लिए गठित उच्च-स्तरीय समिति की अनुशंसाओं पर सहमति प्रदान कर दी है। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने हेतु पांच अनुशंसाएं की हैं। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि खराब प्रदर्शन करने वाले बैंकों की न केवल कड़ी निगरानी होगी, बल्कि अगले छह माह में सुधार नहीं दिखने पर उनके सरकारी डिपॉजिट पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। यानी कि उन बैंकों में सरकार अपना धन नहीं रखेगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य में बैंकिंग व्यवस्था को सुदृढ़ करने और वित्तीय लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से 22 जनवरी को वित्त विभाग द्वारा इस समिति का गठन किया गया था।
विकास आयुक्त इसके अध्यक्ष हैं। वित्त विभाग के सर्वोच्च पदाधिकारी, रिजर्व बैंक के निदेशक, नाबार्ड और स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक इसके सदस्य हैं। बहरहाल यह समिति सौ अंकों वाले प्रमुख मापदंडों पर बैंकों की रैंकिंग कर रही।
स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) सहित 15 बैंक मापदंड पर खरे नहीं उतरे हैं। समिति की अनुशंसा है कि उन बैंकों को वित्त सचिव के स्तर से पत्र निर्गत कर प्रदर्शन में सुधार की चेतावनी दी जाए। स्टेट बैंक, पीएनबी, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक, आइडीबीआइ बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बंधन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कर्नाटक बैंक, यूनिटी स्माल फाइनांस बैंक, इंड्सइंड बैंक, उत्कर्ष स्माल फाइनांस बैंक, करूर वैश्य बैंक।
पांच अनुशंसाएं:
1.साख-जमा अनुपात बढ़ाने के लिए वित्तीय वर्ष के संभावित जमा का न्यूनतम 80 प्रतिशत लक्ष्य निर्धारित हो। ऐसे में नाबार्ड इस वर्ष PLP का संशोधन करे, जो 3,55,532 करोड़ रुपये निर्धारित है। उसके आधार पर नया वार्षिक साख योजना (एसीपी) निर्धारित करने हेतु एसएलबीसी से अनुरोध हो।
2.स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक को छोड़कर बाकी बैंकों का सीडी रेशियो 72.75 प्रतिशत है। इन दोनों बैंकों की तुलना में छोटे बैंकों का प्रदर्शन बहुत अच्छा है। प्रमुख बैंकों को एसीपी का अधिक लक्ष्य दिया जाए, ताकि सीडी रेशियो बढ़ सके।
3.केसीसी और दूसरी सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन जनसमर्थ पोर्टल पर लिया जाए। इससे सभी बैंकों को सीधे आवेदन मिल जाएंगे। एसएलबीसी इसमें समन्वय करे।
- पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर में जनसमर्थ पोर्टल पर केसीसी आवेदन अपलोड करने के लिए प्रचार-प्रसार हो। केसीसी खातों की संख्या बढ़ाने के लिए जीविका दीदी, स्वयं सहायता समूहों एवं फार्मर आइडी वाले 50 लाख किसानों को लक्षित किया जा सकता है।
- 50 प्रतिशत से कम सीडी रेशियो और 60 प्रतिशत से कम एसीपी वाले बैंकों को निगरानी में रखा जाए। छह माह में उनके प्रदर्शन में सुधार नहीं होने पर उनके वहां जमा पर रोक लगाई जाए।
