बरसात का मौसम गर्मी से राहत जरूर दिलाता है, लेकिन इसके साथ कई तरह की मौसमी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है। लगातार नमी, जलभराव और गंदगी के कारण बैक्टीरिया, वायरस और फफूंद तेजी से पनपते हैं, जिससे संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि मानसून के दौरान पीलिया, टाइफाइड, दस्त, वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के मामले अधिक देखने को मिलते हैं। ऐसे में इनके लक्षणों की पहचान करना और समय पर इलाज कराना बेहद जरूरी है।
1. वायरल बुखार
मानसून में वायरल बुखार सबसे आम संक्रमणों में गिना जाता है। इसमें तेज बुखार के साथ सिरदर्द, पूरे शरीर में दर्द, कमजोरी, गले में खराश और हल्की खांसी जैसी परेशानियां हो सकती हैं। कई बार लोग इसे सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यदि बुखार दो से तीन दिन से अधिक समय तक बना रहे, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
2. डेंगू
डेंगू संक्रमित मच्छर के काटने से होने वाला वायरल संक्रमण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, मतली, उल्टी, शरीर पर चकत्ते और लिम्फ नोड्स में सूजन शामिल हो सकते हैं। संक्रमण के लगभग 4 से 10 दिन बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं और ये 2 से 7 दिनों तक रह सकते हैं।
3. मलेरिया
बरसात के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने के कारण मलेरिया का खतरा भी बढ़ जाता है। WHO के मुताबिक, इसके शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और ठंड लगकर कंपकंपी आना शामिल है। संक्रमित मच्छर के काटने के करीब 10 से 15 दिन बाद लक्षण उभर सकते हैं। गंभीर मामलों में भ्रम की स्थिति, दौरे पड़ना, सांस लेने में दिक्कत, गहरे रंग का पेशाब, पीलिया या असामान्य रक्तस्राव जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। यदि बार-बार बुखार, कंपकंपी, अधिक पसीना या कमजोरी महसूस हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें और जांच करवाएं।
