May 23, 2026
t. v. narendran (2)

टाटा स्टील के सीईओ व ग्लोबल प्रबंध निदेशक टी वी नरेन्द्रन ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध व वैश्विक अस्थिरता के कारण आने वाली जून तिमाही में कच्चे माल की लागत 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. उन्होंने कहा कि कंपनी अब तक बढ़ी हुई लागत का अधिकांश हिस्सा बाजार से वसूलने में सफल रही है. उन्होंने कहा कि भारत व यूरोप में कोकिंग कोल की कीमतें 10 से 15 डॉलर प्रति टन तक बढ़ सकती हैं. इसके अलावा प्रोपेन व चूना पत्थर जैसे अन्य इनपुट की लागत में भी बढ़ोतरी हुई है. उहोंने कहा कि कंपनी लगातार लागत नियंत्रण व बेहतर मूल्य निर्धारण के जरिए स्थिति संभाल रही है।

टाटा स्टील के सीईओ व ग्लोबल प्रबंध निदेशक टी वी नरेन्द्रन ने राष्ट्रीय स्तर के एक अंग्रेजी समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि मार्च तिमाही में मजबूत मांग, ऊंची स्टील कीमतों और कम लागत वाले पुराने इन्वेंट्री के उपयोग से कंपनी ने बेहतरीन तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया. घरेलू बाजार में स्टील की मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे कंपनी को बेहतर परिणाम मिले हैं. उन्होंने लुधियाना में स्थापित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ) प्लांट के बारे में कहा कि इसकी परिचालन लागत ब्लास्ट फर्नेस की तुलना में अधिक होती है, लेकिन पंजाब में बिजली की कम लागत व हरित ऊर्जा की उपलब्धता कंपनी के लिए लाभकारी है. उन्होंने कहा कि यह 0.8 मिलियन टन क्षमता वाला प्लांट करीब 3,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है और इसे दो वर्षों में स्थापित किया गया।

उन्होंने कहा कि इस प्लांट का बिजनेस मॉडल 300 किलोमीटर के दायरे में स्क्रैप स्टील एकत्र कर बिक्री करने पर आधारित है, जिससे परिवहन लागत कम होगी। लुधियाना प्लांट का इबिटा मार्जिन पारंपरिक इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट से कम हो सकता है, लेकिन निवेश पर रिटर्न तुलनात्मक रूप से बेहतर रहने की उम्मीद है. टाटा ब्रांड के तहत बिकने वाले लंबे स्टील उत्पादों को बाजार में प्रीमियम मूल्य मिलने की संभावना जतायी।

उन्होंने नीदरलैंड कारोबार को लेकर हा कि वहां का व्यवसाय अधिकांश समय इबिटा स्तर पर फायदे में रहा है, सिर्फ दो वर्ष पहले ब्लास्ट फर्नेस-6 बंद होने के दौरान कारोबार प्रभावित हुआ था. उन्होंने कहा कि नियामकीय अनुपालन लागत के कारण फायदे में उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन नीदरलैंड्स यूनिट ने कभी भारत से वित्तीय सहायता नहीं मांगी. उन्होंने कहा कि भविष्य में नई सुविधाएं स्थापित करने के लिए नियामकीय वातावरण व सरकारी शर्तें महत्वपूर्ण होंगी, जिस पर कंपनी की सरकार के साथ बातचीत जारी है।

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