नगर निगम की ओर से शुक्रवार को अतिक्रमण के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाते हुए कुर्जी क्षेत्र में लगभग एक बीघा भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया। अभियान के तहत गंगा तट के समीप अवस्थित एक कार कंपनी के शोरूम व सर्विस सेंटर तथा एक अन्य कार कंपनी के सर्विस सेंटर को ध्वस्त किया गया। उक्त दोनों संरचनाएं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की गाइडलाइंस तथा भवन निर्माण उपविधियों (बिल्डिंग बायलाज) का उल्लंघन करते हुए निर्मित की गई थीं, जिसके विरुद्ध निगम ने नियमानुसार कार्रवाई की। नगर आयुक्त यशपाल मीणा की निगरानी में पूरी कार्रवाई हुई। सुबह छह बजे प्रारंभ हुए अभियान के दौरान निगम के सभी अपर नगर आयुक्त, सभी उप नगर आयुक्त, पाटलिपुत्र, बांकीपुर एवं पटना सिटी अंचल के कार्यपालक पदाधिकारी तथा 10 दंडाधिकारी की उपस्थिति में कार्रवाई की गई। अभियान के सफल संचालन के लिए जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए लगभग 100 सुरक्षा कर्मियों की भी तैनाती की गई थी।
ध्वस्तीकरण कार्य के लिए छह जेसीबी, एक पोकलेन, एक हाइड्रा एवं एक वाइब्रेटर मशीन का उपयोग किया गया। मशीनों की सहायता से अवैध संरचनाओं को हटाकर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया गया।
पूरी कार्रवाई की निगरानी ड्रोन कैमरे से की गई। नगर निगम द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा, नियमों के विरुद्ध निर्माण तथा पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के विरुद्ध आगे भी नियमित एवं सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
विदित हो कि नगर निगम द्वारा विगत कई दिनों से शहर में अतिक्रमण के विरुद्ध सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बुद्धा कालोनी स्थित बीडी पब्लिक स्कूल के समीप एकता माल के लिए स्वीकृत भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने की कार्रवाई भी की जा रही है। उक्त अभियान के अंतर्गत अब तक लगभग 30 मकानों एवं पांच खटालों को हटाया जा चुका है, जबकि अन्य अवैध स्थायी संरचनाओं को भी हटाने की कार्रवाई जारी है। अप्रैल में गंगा तट क्षेत्र में अवैध संरचनाओं पर कार्रवाई की तैयारी के तहत नगर निगम ने दीघा से बांस घाट तक सीमांकन अभियान चलाया था। नगर निगम मुख्यालय और अंचल कार्यालय की संयुक्त टीम ने क्षेत्र में पहुंचकर उन भवनों और हिस्सों का सीमांकन किया था, जिन पर 2023 में विजिलेंस केस के तहत आदेश पारित हुआ था। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों पर कार्रवाई की गई थी।
जिन संपत्तियों पर अवैध निर्माण की शिकायतें थीं, उन्हें पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है। नोटिस देने के बाद संबंधित भवनों के अवैध हिस्सों का सीमांकन किया गया। कहीं पूरी इमारत, तो कहीं कुछ मंजिल या आंशिक निर्माण को अवैध घोषित किया गया है।
कुल 19 संपत्तियों पर विजिलेंस केस चला था और आदेश भी पारित हुआ था। अवैध संरचनाओं पर कार्रवाई सीमांकन के बाद शुरू की गई है। गंगा नदी की बाहरी सीमा (सिंचाई विभाग द्वारा निर्धारित) से 200 मीटर की परिधि, या राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर तय अधिक दूरी के भीतर किसी भी भवन के नए निर्माण या पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, विरासत भवनों की मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य इस प्रतिबंध से बाहर रहेंगे।
गंगा के अलावा अन्य नदियों के मामले में, संबंधित नदी की बाहरी सीमा (सिंचाई विभाग द्वारा निर्धारित) से 100 मीटर की परिधि, या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दूरी के भीतर किसी भी भवन के निर्माण या पुनर्निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। राज्य सरकार ऐसी नदियों की सूची अधिसूचित करेगी। नदी की वास्तविक सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। हालांकि, इन प्रविधानों के बावजूद योजना प्राधिकरण या सरकारी एजेंसियां सरकार की मंजूरी से नदी तट, घाटों के विकास, सुंदरीकरण या पुनर्निर्मित भूमि पर अन्य नियोजित विकास कार्य करा सकेंगी।
