जमशेदपुर में फर्जी दस्तावेजों के जरिए तीन अफगानी नागरिकों के मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का मामला सामने आने के बाद अब झारखंड में भारतीय पासपोर्ट को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच पासपोर्ट वेरिफिकेशन के दौरान 19 ऐसे लोगों की पहचान हुई, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी कागजात के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया था। जांच के बाद इन सभी के पासपोर्ट रद्द कर दिए गए।
सामने आए 19 मामलों में नौ अकेले जमशेदपुर के हैं। इनमें वे तीन अफगानी नागरिक भी शामिल हैं, जिनके करीब 26 वर्षों से जमशेदपुर में रहने और फर्जी कागजात के सहारे मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की बात सामने आई थी। धनबाद से तीन, रांची और पश्चिमी सिंहभूम से दो-दो मामले मिले हैं। इसके अलावा बोकारो, साहिबगंज और ओडिशा से एक-एक मामला सामने आया है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद रांची स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने संबंधित मामलों की दोबारा जांच कराई। जांच में इन लोगों की नागरिकता संदिग्ध मिली और यह सामने आया कि वे भारतीय नागरिक नहीं हैं। इसके बाद संबंधित सभी पासपोर्ट रद्द कर दिए गए।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि भारतीय नागरिक के तौर पर पहचान बनाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे। इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड और जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज शामिल हैं। इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल पासपोर्ट हासिल करने के लिए किया गया। जांच में अफगानी और बांग्लादेशी नागरिकों के अलावा अन्य देशों के नागरिकों के नाम भी सामने आए हैं।
पासपोर्ट कार्यालय ने मामले की जानकारी संबंधित जिलों के डीसी, एसएसपी या एसपी के अलावा सुरक्षा एजेंसियों को भी दे दी है। अब पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच करेगी। दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, अभी सामने आए मामले जनवरी से अगस्त 2026 के बीच के हैं। फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद पासपोर्ट कार्यालय ने संदिग्ध पासपोर्ट और उनके आवेदन पत्रों की जांच तेज कर दी है। संबंधित दस्तावेजों के साथ-साथ पुलिस सत्यापन रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है।
इस मामले ने पासपोर्ट जारी करने से पहले होने वाली दस्तावेजी और पुलिस जांच पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी दस्तावेज सत्यापन के दौरान कैसे बच गए और पुलिस वेरिफिकेशन में इनकी पहचान क्यों नहीं हो सकी। इसके साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि कहीं इस पूरे फर्जीवाड़े में पासपोर्ट विभाग या पुलिस प्रशासन से जुड़े किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।
