झारखंड में आदिवासी समुदाय के लोगों ने प्रकृति का पर्व सेंदरा पर्व मनाया. इस वर्ष जमशेदपुर व आसपास के क्षत्रों में कई नए बदलाव और सख्ती देखने को मिली है. दलमा के पहाड़ पर धालभूमगढ़, गोविन्दपुर गदड़ा समेत आसपास से सैकड़ों की संख्या में समुदाय के लोग चढ़े. उन्होंने सेंदरा परब पर जल, जंगल जमीन व वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया। दलमा के पहाड़ व आसपास के क्षेत्रों में रविवार की दोपहर में धालभूमगढ़, गोविन्दपुर गदड़ा समेत आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों की संख्या में अपने पारम्परिक हथियार तीन-धनुष व अन्य हथियार लेकर पहुंचें. दलमा पहाड़ के राजा राकेश हेम्ब्रम ने सभी को सेंदर पर्व के मौके पर पूजा पाठ कराया. उसके बाद सेंदरा वीर दलमा पहाड़ पर प्रकृति की पूजा कर दलमा पहाड़ पर शिकार कर निकल पड़े. सोमवार की शाम चार बजे तक सभी दलमा पहाड़ से नीचे उतरे. वे पारंपरिक वेशभूषा पहनकर शिकार यात्रा में शामिल हुए. वहीं वन विभाग ने वन्यजीवों का शिकार नहीं हो इसके लिए पूरी तैयारी कर रखी थी।
दलमा के पहाड़ के क्षेत्र में करीब 300 जवान तैनात किए गए थे। आरसीएफओ अस्मिता पंकज, डीएफओ शबा आलम अंसारी, दलमा वन क्षेत्र के रेंजर दिनेश चंद्रा, मानगो वन क्षेत्राधिकारी दिग्विजय सिंह समेत अन्य पदाधिकारी भी सोमवार को सुबह से लेकर शाम तक दलाम पहड़ा व आसपास के क्षेत्रोंं धूमते रहे. उन्हें कुछ सेंदरा वीर भी मिले लेकिन सभी पूजा पाठ कर रहे थे. इस दौरान कई जगहों पर चेकपोस्ट बनाए, ताकि अवैध शिकार रोका जा सके. वन विभाग ने खासकर दलमा वन्यजीव अभ्यारण क्षेत्र में शिकार पर सख्त निगरानी रखी थी और लोगों को जागरूक भी किया जा रहा. इस मौके पर दलमा पहाड़ से नीचे उतरे आदिवासी समुदाय के लोगों ने कहा कि उन्होंने इस बार वन्यजीवों का ख्याल रखा. उन्होंने परम्परा के अनुसार सेंदरा परब मनाया।
सेंदर पर्व में समाज का मिला सहयोग नहीं हुआ वन्यजीवों का शिकार: दिनेश चंद्रा
सोमवार को दलमा बुरू सेंदरा समिति के आह्वान पर बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग दलमा पहाडि़य़ों में पारंपरिक सेंदरा पर्व मनाने के लिए एकत्र हुए. दलमा वन्यअभ्यारण्य के रेंजर दिनेश चंद्रा ने मीडिया से बात करते हुए आदिवासी समुदाय का आभार जताते हुए कहा कि इस वर्ष सेंदरा पर्व के दौरान वन्यजीवों के शिकार की कोई घटना सामने नहीं आयी है. उन्होंने दलमा ईको-डेवलपमेंट कमेटी के सदस्यों व स्थानीय ग्रामीणों को इसके लिए बधाई दी. उन्होंने कहा कि दलमा ईको-डेवलपमेंट कमेटी के सहयोग से सेंदरा पर्व के दौरान किसी भी वन्यजीव का शिकार नहीं हुआ. उन्होंने 85 गांव के ग्रामीणों को भी जिम्मेदारी से पर्व मनाने का श्रेय दिया. इस मौके पर डीएफओ शबा आलम अंसारी ने विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों का भी आभार जताया, जिन्होंने लगातार जागरूकता अभियान चलाया. उन्होंने कहा कि हमें खुशी है कि इन अभियानों का सकारात्मक परिणाम देखने को मिला है और किसी भी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है।
आरसीएफओ अस्मिता पंकज ने भी कहा कि आदिवासी समुदाय का सेंदरा परब लोगों ने पूजा पाठ कर मनाया. इस दौरान उन्होंने कहीं कोई वन्यजीवों का शिकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भी अपील की रखी थी कि वे अपनी परम्परा के साथ सेंदरा परब मनाएं लेकिन वन्यजीवों का शिकार नहीं करें. उन्होंने आदिवासी समुदाय को वन विभाग को मिले सहयोग के लिए आभार जताया।
