इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (आईआईबी) ऑफ इंडिया द्वारा वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2025 के लिए संकलित जीवन बीमा व्यवसाय आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, वित्तीय जिम्मेदारियों के बढ़ने के साथ भारतीय उच्च कवरेज का चयन करके अपनी जीवन बीमा सुरक्षा को तेजी से मजबूत कर रहे हैं। विश्लेषण में पांच साल की अवधि के दौरान विभिन्न श्रेणियों में उच्च-मूल्य वाली जीवन बीमा पॉलिसियों की ओर स्पष्ट बदलाव देखा गया। ₹2 लाख से ₹5 लाख की बीमा राशि वाली पॉलिसियों की हिस्सेदारी 5.6 प्रतिशत बढ़ी, जबकि ₹10 लाख से ₹25 लाख की श्रेणी में 2 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
₹50 लाख से अधिक की बीमा राशि वाली पॉलिसियों में 68% की बढ़ोतरी हुई, जो वित्त वर्ष 2021 में 4.4 मिलियन से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 7.4 मिलियन हो गई, जिससे ₹975 बिलियन का वार्षिक प्रीमियम प्राप्त हुआ। इस बीच, ₹2 लाख या उससे कम बीमा राशि वाली चालू (इन-फोर्स) पॉलिसियों का अनुपात वित्त वर्ष 2021 में 65.1% से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 53.6% रह गया। कुल चालू पॉलिसियों की संख्या लगभग 343 मिलियन पर स्थिर रही, जबकि प्रति पॉलिसी औसत वार्षिक प्रीमियम 42.6% बढ़कर ₹15,567 से ₹22,195 हो गया। इंश्योरेंस अवेयरनेस कमेटी (आईएसी)-लाइफ के चेयरमैन कमलेश राव ने कहा कि यह रुझान दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा तंत्र के रूप में जीवन बीमा के प्रति बढ़ती मान्यता को दर्शाता है।
आईएसी-लाइफ के अनुसार, बढ़ती आय, मुद्रास्फीति, बदलती जिम्मेदारियां, अधिक जागरूकता और वित्तीय लचीलेपन पर कोविड-19 महामारी के प्रभाव ने इस बदलाव में योगदान दिया है। बीमा कंपनियों ने विविध सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अनुरूप उत्पाद भी पेश किए हैं। आईएसी-लाइफ ने कहा कि जल्दी शुरुआत करने से व्यक्तियों को कम उम्र में कवरेज हासिल करने और आय, जिम्मेदारियों व वित्तीय लक्ष्यों के बढ़ने के साथ धीरे-धीरे सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिलती है।
