विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला में ई-वेस्ट पुनर्चक्रण विषयक पांच दिवसीय मास्टर ट्रेनर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन किया गया। कार्यक्रम के तहत ई-वेस्ट प्रबंधन एवं अपशिष्ट प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) पुनर्चक्रण की वैज्ञानिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने संस्थान परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 1 से 5 जून तक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय व मिशन लाइफ के तहत “ई-वेस्ट प्रबंधन हेतु अनौपचारिक क्षेत्र क्षमता निर्माण” विषय पर आयोजित किया गया। इसका संयुक्त आयोजन सीएसआईआर-एनएमएल, सी-मैट हैदराबाद और सिपेट-एलएआरपीएम भुवनेश्वर द्वारा किया गया।
समापन समारोह को संबोधित करते हुए सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी ने कहा कि ई-वेस्ट पुनर्चक्रण केवल कचरा प्रबंधन का विषय नहीं है, बल्कि यह संसाधन संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और आजीविका से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने अनौपचारिक क्षेत्र में हो रही पुनर्चक्रण गतिविधियों को वैज्ञानिक एवं सुरक्षित ढांचे से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे मास्टर ट्रेनर्स तैयार करना था, जो देशभर में लगभग 15 हजार अनौपचारिक ई-वेस्ट पुनर्चक्रणकर्ताओं को सुरक्षित और वैज्ञानिक पुनर्चक्रण तकनीकों का प्रशिक्षण दे सकें। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ई-वेस्ट संग्रहण, छंटाई, डिस्मैंटलिंग, पूर्व-उपचार तथा मूल्यवान धातुओं की पुनर्प्राप्ति की प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सीएसआईआर-एनएमएल के अर्बन ओर रीसाइक्लिंग सेंटर का भ्रमण कराया गया। यहां डॉ. मनीष कुमार झा ने पीसीबी पुनर्चक्रण में प्रयुक्त तकनीकों, मशीनों तथा ग्रेविटी सेपरेशन की प्रक्रिया की जानकारी दी। प्रतिभागियों ने हाइड्रोमेटलर्जिकल प्रसंस्करण, लीचिंग, फिल्ट्रेशन, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन, स्ट्रिपिंग और इलेक्ट्रो-विनिंग जैसी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि ई-वेस्ट को केवल कचरे के रूप में नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण द्वितीयक संसाधन के रूप में देखा जाना चाहिए। वैज्ञानिक पुनर्चक्रण के माध्यम से तांबा, एल्यूमिनियम और सोने जैसी मूल्यवान धातुओं की प्रभावी पुनर्प्राप्ति संभव है, जबकि असुरक्षित और पारंपरिक तरीकों से पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
अंतिम दिन प्रतिभागियों का मूल्यांकन परीक्षा के माध्यम से किया गया। इसके बाद डॉ. अंकुर शर्मा और डॉ. मनीष कुमार झा के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए। सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
वृक्षारोपण कर दिया हरित भविष्य का संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस और प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन के उपलक्ष्य में सीएसआईआर-एनएमएल परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर टेरी और रीकार्ट से जुड़े 12 मास्टर ट्रेनर्स ने आम के पौधे लगाए। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए जिम्मेदार पुनर्चक्रण और हरित पर्यावरण को सुरक्षित भविष्य की आधारशिला बताया।
विशेषज्ञों ने कहा कि अनौपचारिक ई-वेस्ट क्षेत्र को वैज्ञानिक प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों से जोड़कर देश में संसाधन दक्षता, सर्कुलर इकोनॉमी तथा पर्यावरण-अनुकूल ई-वेस्ट प्रबंधन को नई दिशा दी जा सकती है।
