April 18, 2026
1503103-capture

 विधानसभा चुनाव की रणभेरी बजते ही कांग्रेस ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर राज्य की सियासत में तीसरे विकल्प के रूप में अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश की मौजूदगी में जारी इस मेनिफेस्टो में कांग्रेस ने सीधे तौर पर ममता सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को चुनौती देते हुए गारंटियों की झड़ी लगा दी है। 
पार्टी ने राज्य की डगमगाती अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने और युवाओं के पलायन को रोकने को अपना प्राथमिक लक्ष्य बताया है। कांग्रेस के लोकलुभावन वादों में सबसे प्रमुख महिलाओं को हर महीने 2000 रु. की आर्थिक सहायता देना है, जो तृणमूल की वर्तमान योजना से कहीं बड़ा दांव माना जा रहा है। इसके साथ ही अन्नदाताओं को साधने के लिए किसानों को सालाना 15,000 रुपये की सीधी मदद, मुफ्त बिजली और फसल खरीद की बेहतर व्यवस्था का वादा किया गया है। बेरोजगारी को बंगाल का सबसे बड़ा घाव बताते हुए कांग्रेस ने राज्य के सभी सरकारी रिक्त पदों को तत्काल भरने और हर जिले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर विकसित करने की घोषणा की है ताकि स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा मिल सके और युवाओं को घर के पास ही काम मिले। 
पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें एक ही सिक्के के दो पहलू करार दिया। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले 15 वर्षों के तृणमूल शासन में उद्योग ठप हो गए हैं।
 वहीं भाजपा केवल सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और केंद्रीय एजेंसियों के दम पर विपक्ष को डराने की राजनीति कर रही है। जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि बंगाल में कांग्रेस लंबे समय बाद अकेले चुनाव लड़कर जनता को एक नया और ईमानदार विकल्प दे रही है। 
उन्होंने भाजपा पर रवींद्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जैसी विभूतियों के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर कांग्रेस ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने की बात कही है। भ्रष्टाचार को लेकर पार्टी ने कड़ा रुख दिखाते हुए कहा कि मंत्रियों के पास से करोड़ों रुपये बरामद होना शर्मनाक है और उनकी सरकार आने पर दोषियों की जगह सलाखों के पीछे होगी। महिलाओं की सुरक्षा के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट और सभी के लिए 10 लाख रुपये तक के मुफ्त सरकारी स्वास्थ्य बीमा का वादा भी घोषणापत्र का अहम हिस्सा है। कांग्रेस का दावा है कि वह विकास, सामाजिक सौहार्द और रोजगार के आधार पर बंगाल को उसकी पुरानी औद्योगिक पहचान वापस दिलाएगी। अब देखना यह है कि तृणमूल और भाजपा के बीच फंसे बंगाल के मतदाता कांग्रेस के इस ‘विजन डॉक्यूमेंट’ पर कितना भरोसा जताते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *