July 21, 2026
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जिला पुलिस की विशेष टीम द्वारा रविवार को जिले के चार थानाक्षेत्र चकिया, मधुबन, गढ़हिया व फेनहारा में छापेमारी कर पहली बार अवैध कारतूस निर्माण फैक्ट्री का पर्दाफाश किए जाने के बाद एक बार फिर जिले में हथियार खरीद -बिक्री के नेटवर्क की याद ताजा हुई है।
पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर जिला में सक्रिय अवैध हथियार नेटवर्क से जुड़े लोगों की नींव हिला दी है। यह पहली बार है जब पुलिस को जिला में संचालित अवैध कारतूस फैक्ट्री का पर्दाफाश करने में पुलिस को सफलता मिली है। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच व कारतूस के अवैध धंधे के मास्टर माइंड गड़हिया थानाक्षेत्र के मड़पा निवासी श्रीकांत से कई गई पूछताछ के बाद यह बात सामने आई है कि गिरोह का नेटवर्क उत्तर बिहार के कई जिलों में फैला है। उनमें पश्चिमी चंपारण (बेतिया) व मुजफ्फरपुर प्रमुख केंद्र के तौर पर सामने आए हैं। गिरोह से जुड़ी कई बातें सामने आई हैं, जिन्हें पुलिस गोपनीय रखते हुए आगे की छापेमारी कर रही है। जानकार बताते हैं कि जिले में भले ही कारतूस की फैक्ट्री पहली बार मिली, लेकिन मिनी गन फैक्ट्री इससे पहले भी पकड़ी गई है। वर्ष 2020 से अबतक जिले में करीब पांच मिनी गन फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ हो चुका है। सितंबर 2020 में पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र के सिरहा गांव में पुलिस ने मिनी गन फैक्ट्री का उद्भेदन किया था। मौके से निर्मित और अर्द्धनिर्मित हथियार, हथियार बनाने के उपकरण बरामद किए गए थे तथा दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। 28 अगस्त 2024 को चिरैया थाना क्षेत्र में वाहन जांच के दौरान मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने एक झोपड़ी में संचालित मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। तब हथियार, कारतूस और निर्माण में प्रयुक्त उपकरण बरामद किए गए थे।

इसके महज लगभग दो सप्ताह बाद 10 सितंबर 2024 को चकिया के शास्त्री नगर में किराए के मकान में चल रही दूसरी मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा हुआ था। कार्रवाई में पांच अपराधी गिरफ्तार हुए थे। तब छापेमारी में आधा दर्जन देसी पिस्टल, 73 कारतूस, मैगजीन, ग्राइंडर मशीन समेत बड़ी मात्रा में सामान बरामद किए गए थे। हालांकि गिरोह का मास्टरमाइंड तब फरार हो गया था। अप्रैल 2025 में रक्सौल अनुमंडल के पलनवा थाना क्षेत्र के सिरिसिया गांव में मुर्गी फार्म की आड़ में संचालित मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ था। तब मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था। छापेमारी में देसी कारबाइन, पिस्टल, बड़ी संख्या में कारतूस, अर्द्धनिर्मित हथियार और हथियार बनाने की मशीनें बरामद की गई थी। इसके बाद अगस्त 2025 में पचपकड़ी थाना क्षेत्र के देवापुर गांव में भी पुलिस ने एक अन्य मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा किया था। इस कार्रवाई में दो हथियार तस्कर गिरफ्तार किए गए थे। हथियार बनाने के उपकरण, कल-पुर्जे तथा अन्य सामग्री जब्त की गई। जिले की करीब 115 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील मानी जाती है। खुली सीमा और सीमावर्ती गांवों के बीच सहज आवाजाही का फायदा उठाकर तस्कर वर्षों से शराब, मादक पदार्थ, नकली सामान और अवैध हथियारों की तस्करी की कोशिश करते रहे हैं।
यही वजह है कि जिले में जब भी अवैध हथियारों की बड़ी खेप या मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा होता है। जांच एजेंसियां उसकी कड़ियों को सीमावर्ती क्षेत्रों तक खंगालती हैं।

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