बिहार का साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर (1930) जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित होगा। इससे कॉल सेंटर पर साइबर अपराध और ठगी से जुड़ीं शिकायतें वर्तमान के मुकाबले काफी कम समय में दर्ज हो सकेंगी। वहीं, नई व्यवस्था में कार्रवाई में लगने वाला समय घटेगा और पीड़ितों को ‘गोल्डन आवर’ का फायदा मिलेगा। अधिकारियों के मुताबिक बिहार में संभवत: देश के पहले एआई आधारित साइबर हेल्पलाइन कॉल सेंटर को अगले तीन से चार महीने में तैयार कर लिया जाएगा। मशीन शिकायत दर्ज कर डेटाबेस करेगी अपडेट
वर्तमान व्यवस्था में 1930 पर साइबर अपराध से पीड़ितों की शिकायत मानव ऑपरेटर द्वारा सुन कर मैनुअल रूप से रजिस्टर की जाती है। इसमें प्रत्येक केस पर न्यूनतम 16 से 18 मिनट का समय लगता है। दावा है कि नई व्यवस्था में यह समय घटकर मात्र पांच से छह मिनट रह जाएगा। नई प्रणाली में 1930 पर एआई-सक्षम इंटरफेस, रियल-टाइम वॉयस-टू-टेक्स्ट टेक्नोलॉजी और संरचित प्रश्नावली के सहारे शिकायतकर्ता के तथ्यों को मशीन तुरंत रिकॉर्ड कर संबंधित डेटाबेस में अपडेट कर देगा। इससे सूचना की सटीकता बढ़ेगी और टाइपो या ट्रांसक्रिप्शन से होने वाली त्रुटियां कम होंगी। एआई आधारित सिस्टम होने से साइबर ठगी के पैटर्न का तत्काल विश्लेषण करने में आसानी होगी। उन डिजिटल उपकरणों को पहचान हो सकेगी, जिनसे एक से अधिक बार अलग-अलग लोगों से ठगी की गई। भविष्य में पीड़ितों को बहुभाषी कॉल सेंटर की सेवा देने की भी योजना है, ताकि स्थानीय भाषाओं में भी शिकायत दर्ज करायी जा सके। अधिकारी ने बताया कि फरवरी में नई साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (सीसीएसयू) के गठन के बाद 1930 पर आईवीआरएस (इंटरेक्टिव व्हाइस रिस्पांस सिस्टम) की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। इसमें कांउसलर प्रश्न और प्राथमिक जानकारी स्वचालित रूप से लेती है। इस दौरान पीड़ित से बैंक का नाम, खाता संख्या, ट्रांजेक्शन आईडी या यूटीआर नंबर, घटना की तिथि, समय और संदिग्ध की विवरणी आदि मांगा जाता है। सीसीएसयू ने मौजूदा फोन लाइनों की संख्या भी 25 से बढ़ाकर दोगुना 50 करने का लक्ष्य रखा है। हर दिन प्राप्त होने वाली कॉल की संख्या 8100 हुई
आईजी (साइबर) रंजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि फरवरी 2026 से आईवीआरएस लागू होने के बाद प्रतिदिन प्राप्त होने वाली औसत कॉल की संख्या 5500 से बढ़ कर 8100 हो गयी है। साथ ही साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पंजीकरण के मामले भी औसतन 295 से बढ़ कर 430 हो गयी है। वित्तीय ठगी के मामलों में पहले दो घंटे ‘ गोल्डन आवर’ होते हैं।
साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई के शिकायत दर्ज होने से लेकर संबंधित एजेंसियों तक इसकी सूचना जल्द पहुंचने पर राशि होल्ड कराना आसान होगा। बिहार के साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 को एआई से लैस किया जा रहा है। संभवत: यह देश का पहला एआई आधारित साइबर हेल्पलाइन होगा। इससे शिकायत दर्ज करने का समय घटेगा, वहीं कार्रवाई में भी तेजी आएगी। साइबर ठगी के पैटर्न को भी समझने में आसानी होगी।
