नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी में आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर कई राज्यों के 60 हजार से अधिक लोगों को नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोह के छह आरोपितों को अर्रा रोड स्थित मंगलम गार्डन से गिरफ्तार किया गया। गिरोह के सरगना व कंपनी के दो सीएमडी समेत आरोपित फरार हैं। ये गिरोह बिना पंजीकृत आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्रीआ इसी नेटर्वक मार्केटिंग के जरिए करते थे। गिरोह हर दिन अलग होटलों में सेमिनार कर जाल में फंसाता था। आरोपितों को कोर्ट में पेश किया जा रहा है। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि एडीसीपी आपरेशन सुमित सुधाकर रामटेके की टीम ने विन मेकर आयुर्वेदा प्राइवेट लिमिटेड नाम से संचालित नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों के बेरोजगारों को नौकरी दिलाने और जल्द बड़ा आदमी बनने का सपना दिखा ठगी करने वाले गिरोह के छह आरोपितों को पकड़ा है। इसमें बिहार के बेगूसराय निवासी रवींद्र यादव, पटना के मनेर निवासी कमलेश कुमार, भोजपुर के शाहपुर निवासी मंतोष पासवान,बंगाल के साउथ 24 परगना के बजबज निवाड़ी रोहित शाव, मध्य प्रदेश के दतिया निवासी मंगल शाक्य, देवरिया निवासी राजू कुमार हैं।
गिरोह का सरगना व सीएमडी पटना का विजय कुशवाहा और इनामुलहक और उसकी टीम के 10 से अधिक फरार हैं। गिरोह अनाधिकृत आयुर्वेदिक दवाओं की किट को बेचने की आड़ में लोगों को 25 से 50 हजार तक वेतन मिलने का लालच देकर बुलाते हैं। इसके बाद उन्हें मार्केटिंग नेटवर्क से जुड़ने के लिए 12 से 30 हजार रुपये वसूलते हैं। उन लोगों को अलग अलग होटल में रखते और उनका प्रशिक्षण कराते हैं। फिर सेमिनार में उन्हें ले जाते हैं, जहां गिरोह के ही एक व्यक्ति को प्रमोशन होना और उसे सम्मानित कर बाइक मिलने आदि का लालच देते थे, जिससे सेमिनार में रहे 200 से 250 लोग लालच में नेटवर्क से जुड़ें। पुलिस आयुक्त ने बताया कि देशभर में इस गिरोह ने 60 हजार से अधिक लोगों से करोड़ों रुपये ठगा है, जिसमें कानपुर की इनकी यूनिट में दो हजार लोग फंसे थे। एडीसीपी सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि नेटवर्क मार्केटिंग में जोड़ने के बाद युवाओं को ट्रेनिंग सेंटर में मनोविज्ञानिक तरीके से ब्रेनवाश किया जाता था। उन्हें लग्जरी लाइफ स्टाइल बता उनमें लालच बढाया जाता है, जिससे चेन आगे बढ़ाने के लिए इससे जुड़े युवा अपने सगे-संबंधी और दोस्तों को इस नेटवर्क में जोड़ें। प्रति व्यक्ति दो नए लोगों को जोड़ने का दबाव बनाया जाता था और ऐसा न करने पर वेतन न देने और पैसे रिफंड न करने की धमकी दी जाती है।
