भारतीय रिजर्व बैंक केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा लाभांश की तैयारी में है। अर्थशास्त्रियों और वित्तीय विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, इस हफ्ते होने वाली केंद्रीय बोर्ड की बैठक में आरबीआई सरकार को २.७ लाख करोड़ से ३ लाख करोड़ रुपये के बीच लाभांश हस्तांतरित करने की घोषणा कर सकता है, जो पिछले साल के रिकॉर्ड २.६९ लाख करोड़ रुपये से भी अधिक होगा। वित्त वर्ष २०२६ में विदेशी मुद्रा बाजार में किए गए हस्तक्षेप, वैश्विक स्तर पर ऊंची ब्याज दरों से हुई निवेश आय और सोने की कीमतों में आई ६० प्रतिशत की भारी उछाल के कारण केंद्रीय बैंक की कमाई में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसके अलावा, यदि आरबीआई अपने संशोधित ‘इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क’ के तहत आकस्मिक जोखिम बफर को ऊपरी सीमा ७.५ प्रतिशत से घटाकर ६.५ प्रतिशत करने का फैसला करता है, तो लाभांश की यह राशि बढ़कर ३.४ लाख करोड़ रुपये तक भी पहुँच सकती है।
यह रिकॉर्ड लाभांश केंद्र सरकार के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण ‘वित्तीय बफर’ साबित होगा। वर्तमान में पश्चिम एशिया और ईरान संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी अस्थिरता है, जिससे भारत का आयात बिल और राजकोषीय घाटा बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। ऐसे कठिन समय में आरबीआई और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के रिकॉर्ड मुनाफे (जो वित्त वर्ष २०२६ में ११.१ प्रतिशत बढ़कर १.९८ लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया है) से मिलने वाला यह लाभांश सरकार को बिना टैक्स बढ़ाए या अतिरिक्त कर्ज लिए बजटीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा। सरकार ने बजट दस्तावेजों में आरबीआई, राष्ट्रीयकृत बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कुल ३.१६ लाख करोड़ रुपये के लाभांश का एक रूढ़िवादी (कम) अनुमान लगाया था, लेकिन मौजूदा वित्तीय प्रदर्शन को देखते हुए वास्तविक गैर-कर राजस्व इस बजटीय अनुमान से कहीं अधिक रहने की उम्मीद है।
