26 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है, जबकि लगभग 4,858 लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव दल मलबे के बीच जीवित बचे लोगों की लगातार तलाश कर रहे हैं। इस आपदा ने नेपाल के सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है। अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) से घरों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुँचा है। कई इलाके मुख्य रास्तों से कट गए हैं, जिससे राहत सामग्री पहुँचाना और लापता लोगों को खोजना एक बड़ी चुनौती बन गया है। मलबे के बीच तलाशी अभियान जारी है; बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। राहतकर्मी प्रभावित इलाकों में मलबा हटाकर जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं। जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फँसे लोगों को बचाने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। कई सुरंगें भारी मात्रा में कीचड़ और मलबे से भरी हुई हैं, जिससे बचाव कार्य बहुत मुश्किल हो गया है। अधिकारियों के सामने एक और बड़ी चुनौती बरामद शवों की पहचान करना है; कई शवों की हालत ऐसी है कि पारंपरिक तरीकों से पहचान करना मुश्किल है। इसलिए, मृतकों को उनके परिवारों तक पहुँचाने के लिए DNA सैंपलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है। भारत लगातार मदद कर रहा है; नेपाल में जारी संकट के बीच, भारत ने राहत और बचाव कार्यों के लिए अपना समर्थन बढ़ा दिया है। बुधवार को भारत ने नेपाल के लिए अपनी पाँचवीं राहत उड़ान भेजी, जिसमें 11 सदस्यों की एक विशेष बचाव टीम और लगभग 5.5 टन ज़रूरी दवाएँ थीं। नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ प्रभावित इलाकों में राहत पहुँचाने और लापता लोगों की तलाश करने में जुटी हैं। खराब मौसम, भूस्खलन और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण कई जगहों पर बचाव कार्यों में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ का पानी घटने के साथ ही प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं। दूषित पानी, मलबे और खराब स्वास्थ्य सेवाओं के कारण संक्रमण फैलने की चिंता है। हज़ारों विस्थापित लोग अभी अस्थायी कैंपों और सुरक्षित जगहों पर रह रहे हैं। इस बीच, अधिकारियों की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश करना और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुँचाना बनी हुई है। लगभग एक हफ़्ते बाद भी हज़ारों लोगों का पता न चलने से उनके परिवारों में चिंता बढ़ रही है। बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन मलबे और मुश्किल इलाकों के कारण हर गुज़रते दिन के साथ चुनौती बढ़ती जा रही है।
