बिहार के सहरसा जिले के सरकारी स्कूलों में परोसे जा रहे मिड-डे मील की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महिषी और नवहट्टा प्रखंड में गुरुवार को 250 से अधिक बच्चों के फूड प्वाइजनिंग का शिकार होने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि शुक्रवार को जिले के सौरबाजार प्रखंड से एक और खबर सामने आ गई। यहां के दो सरकारी विद्यालयों में मिड-डे मील खाने के बाद 132 छात्र-छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद स्कूल से लेकर अस्पताल तक भारी अफरा-तफरी मच गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह ताजा मामला सौरबाजार प्रखंड क्षेत्र के कन्या मध्य विद्यालय (मुरचा) और एनपीएस विजयपुर (पूर्वी) का है। शुक्रवार को जैसे ही बच्चों ने स्कूल में परोसा गया खाना खाया, थोड़ी ही देर में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। 132 बच्चों ने एक साथ पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और बुखार की शिकायत की। बच्चों की बिगड़ती हालत देखकर स्कूल परिसर में कोहराम मच गया। शिक्षकों और घबराए हुए अभिभावकों की मदद से आनन-फानन में सभी पीड़ित बच्चों को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) सौरबाजार पहुंचाया गया।
इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने की सूचना मिलते ही सहरसा के डीएम दीपेश कुमार तुरंत अस्पताल पहुंचे। स्थिति का जायजा लेने के बाद डीएम का बयान बेहद चौंकाने वाला रहा। उन्होंने इस पूरी घटना को प्रथम दृष्टया ‘अफवाह’ करार दिया। डीएम ने कहा कि बच्चों को केवल हल्का पेट दर्द था और घबराहट के कारण यह स्थिति बनी। उन्होंने बताया कि ज्यादातर बच्चों को डिस्चार्ज कर दिया गया है। हालांकि, मामले की सच्चाई जानने के लिए एक जांच टीम गठित कर दी गई है। भले ही डीएम इसे अफवाह बता रहे हों, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमित कुमार ने स्पष्ट किया कि अस्पताल लाए गए बच्चों में फूड प्वाइजनिंग के लक्षण (पेट दर्द, उल्टी और बुखार) मौजूद थे। गनीमत यह रही कि सभी बच्चों को समय रहते उचित और तुरंत चिकित्सा सुविधा मिल गई, जिससे दवा देने के बाद अधिकांश बच्चे पूरी तरह से स्वस्थ हो गए।
