भारत-नेपाल सीमा से सटे सोनबरसा थाना क्षेत्र के इंदरवा गांव में शुक्रवार को सुरक्षा एजेंसियों ने जाली नोट के एक बड़े खेल का पर्दाफाश करते हुए कुख्यात धंधेबाज राम प्रीत महतो को गिरफ्तार किया है। उसके घर में की गई छापेमारी के दौरान वहां भारी मात्रा में भारतीय और नेपाली जाली नोट मिले। इसमें नकली और असली नोट दोनों शामिल हैं। छापेमारी के बाद सीमावर्ती इलाके में सनसनी फैल गई है।
एसएसबी 51वीं बटालियन के कमांडेंट संजीव कुमार के निर्देश पर असिस्टेंट कमांडेंट रणजीत वैध के नेतृत्व में एसएसबी, स्टेट एसटीएफ और सोनबरसा थाने की पुलिस ने संयुक्त रूप से यह कार्रवाई की।
घर की तलाशी लेते ही टीम की आंखें फटी रह गईं। कमरे और विभिन्न सामानों में दो-दो सौ के एक लाख 30 हजार 200 भारतीय जाली नोट छिपाकर रखे गए थे। वहीं पांच-पांच सौ के 50 हजार जाली नेपाली नोट भी बरामद किए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह रही कि जाली नोटों के साथ-साथ आरोपित के पास से एक लाख 54 हजार 500 रुपये भारतीय तथा छह हजार 275 रुपये नेपाली असली करेंसी भी जब्त किए गए। इससे जांच एजेंसियों को बड़े नेटवर्क और अवैध लेनदेन की आशंका गहरा गई है। बताया गया कि शातिर रामपरीत महतो के घर से बरामद दो-दो सौ के एक लाख 30 हजार 200 भारतीय जाली नोट तथा पांच-पांच सौ के 50 हजार जाली नेपाली नोट पर सिर्फ एक ही नंबर अंकित है। नेपाली नोट पर 665235 तथा दो दो सौ के जाली भारतीय नोट पर 150862 अंकित है शातिर रामप्रीत ने जाली नोट का धंधा छुपाने के लिए छोटी सी चाय-नाश्ता व नमकीन की एक दुकान खोल रखा था, जिससे किसी को कोई शक नहीं हो। पहले उसकी दुकान में छापेमारी की गई इसके बाद उसके घर पर छापेमारी की गई। जाली नोट का पुराना खिलाड़ी, पहले भी जा चुका है जेल
गिरफ्तार राम प्रीत महतो का आपराधिक रिकार्ड भी लंबा है। पुलिस के अनुसार वह पहले भी जाली नोट और हथियार मामले में जेल जा चुका है। मुजफ्फरपुर जिले के ब्रह्मपुरा थाना कांड संख्या 104/11 में जाली नोट मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी।
वहीं सोनबरसा थाना कांड संख्या 296/23 में आर्म्स एक्ट के तहत भी जेल भेजा जा चुका है। बताया जा रहा है कि जाली नोट के दूसरे मामले और कुल तीसरे बड़े आपराधिक केस में उसकी गिरफ्तारी हुई है। सीमावर्ती इलाकों में उसकी पहचान लंबे समय से जाली नोट के धंधेबाज के रूप में होती रही है।
चर्चा है कि इंदरवा, सोहरवा और झीम नदी के आसपास के इलाकों में लंबे समय से जाली नोट खपाने का नेटवर्क सक्रिय है।स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ सफेदपोशों से आरोपित का संबंध है और उन्हीं के संरक्षण में यह धंधा फल-फूल रहा था।
हालांकि जांच एजेंसियां फिलहाल पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। छापेमारी में सोनबरसा थाना के अपर थानाध्यक्ष सुनील कुमार यादव, सहायक अवर निरीक्षक दिग्विजय सिंह समेत एसएसबी और एसटीएफ के कई जवान शामिल थे। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारी उससे गहन पूछताछ कर रहे हैं।
