बिहार में लूटे हुए माल को बरामद करने के बाद उसमें से 3 लाख रुपये गायब करने वाले चार पुलिसकर्मियों की नौकरी चली गई है। मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) के एसपी स्वर्ण प्रभात ने चारों सिपाहियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। भ्रष्टाचार और कर्तव्यहीनता के मामले में यह कार्रवाई की गई है। बर्खास्त किए गए सिपाहियों में संतोष कुमार, गौतम कुमार यादव, कृष्ण कुमार और ओम प्रकाश शामिल हैं। पिछले साल ही इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।
एसपी स्वर्ण प्रभात ने बताया कि उत्तर प्रदेश के जौनपुर निवासी मोहन गुप्ता नाम के शख्स से आधा दर्जन से अधिक अपराधियों ने पूर्वी चंपारण जिले के गोविंदगंज थाना क्षेत्र स्थित रढिया गांव निवासी अमरेश पांडेय के घर से 19 लाख रुपये कैश, दो मोबाइल फोन और सोने की चेन लूट ली थी। इस मामले में गोविंदगंज थाने में केस दर्ज किया गया था। लूटे गए सामान की बरामदगी के लिए टीम गठित की गई थी। टीम ने 21 नवंबर 2025 को मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज थाना क्षेत्र निवासी मुख्य आरोपी चंदन सिंह के घर छापेमारी की थी। उसके घर से 4.15 लाख रुपये कैश, सोने जैसे दिखने वाले 10 बिस्कुट और एक सोने की चेन बरामद हुई थी। आरोप है कि इसी दौरान छापेमारी टीम में शामिल चारों सिपाहियों ने बरामद बैग से 3 लाख रुपये निकालकर पुलिस की गाड़ी के बीच वाली सीट के मैट के नीचे छिपा दिए। अधिकारियों को संदेह होने पर जब पूछताछ की गई तो गाड़ी में छिपाए गए रुपये बरामद कर लिए गए। इसके बाद तत्कालीन गोविंदगंज थानाध्यक्ष राजकुमार मिश्रा के लिखित बयान पर 22 नवंबर 2025 को मुजफ्फरपुर के साहेबगंज थाने में सिपाहियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। फिर चारों सिपाहियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। मामला सामने आने के बाद चारों सिपाहियों को निलंबित कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। उनका जवाब असंतोषजनक पाया गया। इसके बाद विभागीय जांच के लिए मोतिहारी साइबर क्राइम के एएसपी प्रितीश कुमार को जांच प्राधिकारी और दारोगा सौरभ कुमार आजाद को प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी नियुक्त किया गया। जांच में सबूतों और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद चारों सिपाहियों को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, भ्रष्टाचार और मनमानेपन का दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर मोतिहारी एसपी ने चारों को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया।
