राज्य में लगातार उफान पर चल रहीं नदियां गंभीर बाढ़ का कारण बनी हुई हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बक्सर, समस्तीपुर, खगड़िया, बेगूसराय, दरभंगा, अररिया, पूर्णिया, मधेपुरा और कटिहार सहित कुल 15 जिलों के 88 प्रखंडों के अंतर्गत आने वाली 575 ग्राम पंचायतों की लगभग 49.74 लाख आबादी बाढ़ के संकट से सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। इस आपदा से निपटने के लिए सरकारी स्तर पर युद्ध स्तर पर राहत कार्य जारी हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार इस समय गंडक (मुजफ्फरपुर के डुमरिया घाट), कोसी (खगड़िया के बलतारा और कुरसेला), पुनपुन (श्रीपालपुर), बागमती (बेनीबाद और सोनाखान) और गंगा (गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर और कहलगांव) नदियां अपने खतरे के निशान को पार कर ऊपर बह रही हैं। प्रभावित जनता की सहायता के वास्ते विभिन्न जिलों में कुल 843 सामुदायिक रसोई घरों का संचालन किया जा रहा है, जिससे अब तक करीब 1.56 करोड़ लोग भोजन प्राप्त कर चुके हैं। राहत शिविरों की बात करें तो 13 स्थानों पर बने इन शिविरों में 11,508 शरणार्थियों के ठहरने, खाने-पीने और मेडिकल सुविधाओं का मुकम्मल इंतजाम किया गया है। जरूरतमंदों की मदद के लिए प्रशासन द्वारा लगभग 4.30 लाख पॉलीथीन शीट, 79 हजार ड्राई राशन पैकेट और 1,400 पशु खाद्य पैकेट वितरित किए जा चुके हैं, जबकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत व आवागमन के लिए 1,160 नावों को लगाया गया है और अब तक 16,820 क्विंटल पशुचारा भी बांटा जा चुका है। बराजों के जलस्तर की बात करें तो वाल्मीकिनगर में गंडक 88,300 क्यूसेक, वीरपुर में कोसी 1,59,170 क्यूसेक और इंद्रपुरी में सोन का जलस्तर 69,913 क्यूसेक दर्ज किया गया है, और संभावित खतरों को देखते हुए एनडीआरएफ की 10 तथा एसडीआरएफ की 27 विशेष टीमों को चुनिंदा जिलों में मुस्तैद रखा गया है।
