बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है और राज्य के 12 जिलों में 22 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बढ़ते संकट के बीच राज्य सरकार ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, एक ही दिन में सामुदायिक रसोई की संख्या 80 से बढ़ाकर 190 कर दी गई है, ताकि प्रभावित लोगों तक भोजन और आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके। बाढ़ का असर पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल जिलों के 70 प्रखंडों तथा 368 ग्राम पंचायतों तक फैला है। अधिकारियों के मुताबिक, कई इलाकों में पशुधन बह गया है और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जबकि संपत्ति को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। राहत अभियान के तहत प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच बनाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए व्यापक प्रयास कर रहा है। इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से बिहार की स्थिति को “राष्ट्रीय आपदा” घोषित करने की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य का दौरा कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने और राहत प्रयासों की समीक्षा करने का भी आग्रह किया है। लगातार बढ़ते प्रभावित आबादी के आंकड़े और व्यापक नुकसान ने बिहार में राहत एवं पुनर्वास की चुनौती को और गंभीर बना दिया है।
