स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं उस वक्त और गहरा गईं जब 30 अक्टूबर 2026 को पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर ‘MT LOUISE 1’ को लिंपेट माइंस यानी चुंबकीय बम के जरिए कथित तौर पर निशाना बनाया गया और उस वक्त उस जहाज पर 27 भारतीय नाविक सवार थे, जिनके इंजन रूम में इस धमाके के बाद आग लग जाने से जहाज का संचालन कुछ पलों के लिए बाधित हो गया था, हालांकि क्रू सदस्यों ने समय रहते आग पर पूरी तरह काबू पा लिया और सभी भारतीय सुरक्षित हैं, वहीं केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी भारतीय नाविकों की सुरक्षा की पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार इस पूरे मामले पर करीबी नजर रखे हुए है और लगातार जहाज प्रबंधन कंपनियों के संपर्क में बनी हुई है, जबकि रॉयटर्स न्यूज एजेंसी ने समुद्री सुरक्षा सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने रखी है कि फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से इस होर्मुज क्षेत्र में लिंपेट माइंस के माध्यम से किया गया यह पहला सफल हमला है जिसमें एक छोटी नाव टैंकर के पास पहुंची और उसके बाहरी हिस्से पर दो चुंबकीय विस्फोटक चिपकाकर वहां से चली गई जिसके बाद जहाज में आग लग गई, हालांकि इस पूरी घटना में किसी के भी घायल होने या समुद्र में तेल रिसाव की कोई सूचना नहीं मिली है और आग बुझने के बाद टैंकर ने अपना सफर एक बार फिर से शुरू कर दिया है, और जहाँ तक लिंपेट माइंस की तकनीकी जानकारी का संबंध है तो ये छोटे आकार के विस्फोटक उपकरण होते हैं जिन्हें चुंबक की मदद से जहाज के बाहरी ढांचे पर आसानी से चिपकाया जाता है और समुद्री सुरक्षा कंपनी Marisks के मुताबिक 2017 से इस क्षेत्र में इनका उपयोग देखा जाता रहा है जो कम लागत और आसानी से मिल जाने के कारण छोटी नौकाओं के जरिए चलते हुए जहाजों को निशाना बनाने में उपयोग किए जाते हैं।
