भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के पदाधिकारियों की बैठक में यूपीआई के माध्यम से लगाए जा रहे शुल्क को लेकर चर्चा की गई। बैठक के बाद पार्टी नेताओं ने इसे आम जनता और व्यापारियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बताते हुए शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सरकार पहले लोगों को मुफ्त सुविधाओं का आदी बनाती है और बाद में उन्हीं सेवाओं पर अलग-अलग तरीके से शुल्क और टैक्स वसूलना शुरू कर देती है। नेताओं ने जीएसटी का उदाहरण देते हुए कहा कि दूध-दही, कॉपी-किताब और दवाइयों जैसी आवश्यक वस्तुओं पर भी कर का असर आम लोगों पर पड़ रहा है।
निजी कंपनियों की नीतियों का उदाहरण देते हुए वक्ताओं ने कहा कि पहले मुफ्त कॉल और डेटा जैसी सुविधाएं दी गईं, लेकिन बाद में शुल्क में बढ़ोतरी की गई। इसी तरह रेलवे में भी यात्रियों से विभिन्न प्रकार के कन्वीनियंस चार्ज लिए जा रहे हैं। नेताओं ने कहा कि दूसरी ओर हवाई यात्रा, खाद्यान्न, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतें भी आम लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। भाकपा नेताओं ने कहा कि यूपीआई पर किसी भी प्रकार का शुल्क लागू होने की स्थिति में उसका भार अंततः ग्राहकों पर ही पड़ेगा। व्यापारियों द्वारा यह राशि किसी न किसी रूप में ग्राहकों से वसूल किए जाने की आशंका जताई गई।
बैठक में नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि ब्रिक्स सम्मेलन में देश के डिजिटल होने और डिजिटल भुगतान व्यवस्था की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया, वहीं इसके बाद यूपीआई के माध्यम से शुल्क वसूली की व्यवस्था लागू किए जाने की चर्चा सामने आई। पार्टी ने इसे आम जनता और व्यापारियों के हित के विपरीत बताते हुए शुल्क वापस लेने की मांग की। बैठक की अध्यक्षता धनंजय शुक्ला ने की। इस दौरान भाकपा सिंहभूम जिला परिषद के सचिव कॉमरेड अम्बुज कुमार ठाकुर, एटक के उप महासचिव हीरा अरकने, लीगल सेल के सचिव गिरीश कुमार सिंह, दिलीप कुमार महतो, सत्येंद्र सिंह समेत अन्य पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर् मौजूद थे।
