April 15, 2026
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हैदराबाद साइबर क्राइम थाना की पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुजफ्फरपुर शहर के जवाहरलाल रोड स्थित आइडीएफसी फर्स्ट बैंक के एक्विजिशन मैनेजर विशाल कुमार वर्मा को गिरफ्तार किया है। वह समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर थाना के मालीनगर वार्ड तीन का रहने वाला है। आरोप है कि उसने महज 10 हजार रुपये प्रति खाते के लालच में आकर अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के लिए आधा दर्जन से अधिक फर्जी चालू खाता खोलने का काम किया। इसके जरिए देशभर के सैकड़ों लोगों से करोड़ों की ठगी की गई। आरोपित की गिरफ्तारी बैंक परिसर से हुई है।
गिरफ्तार करने के बाद हैदराबाद पुलिस ने उसे मंगलवार को सीजेएम कोर्ट में प्रस्तुत किया। पुलिस ने आरोपित की छह दिनों की ट्रांजिट देने का अनुरोध किया। इस पर कोर्ट ने तीन दिनों की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की।
नगर थानाध्यक्ष जय प्रकाश सिंह ने बताया कि हैदराबाद पुलिस आई थी। उनके सहयोग से साइबर फ्राड के मददगार बैंक मैनेजर को गिरफ्तार किया गया है। मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब तेलंगाना के श्यामल बिल्डिंग निवासी पूजा बजाज ने 18 जून 2025 को प्राथमिकी कराई। इसमें कहा कि मयंक स्टाक गाइडेंस नामक वाट्सएप ग्रुप के जरिए शेयर बाजार में 500 प्रतिशत मुनाफे का लालच देकर एक फर्जी एप डाउनलोड कराया। उनसे करीब दो लाख 81 हजार 544 रुपये रुपये ठग लिए गए। पुलिस ने जब इस पैसे के लेनदेन की जांच की तो कड़ियां मुजफ्फरपुर के आइडीएफसी बैंक की शाखा से जुड़ीं। वहां मौजूद खुशी इंटरप्राइजेज नामक चालू खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर हुई थी।
मामले में पुलिस ने पहले वैशाली के राजापाकड़ थाना के खाता धारक संजीत कुमार को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर विशाल कुमार वर्मा का पता चला। इसके बाद वह पकड़ा गया।
हैदराबाद साइबर क्राइम थाना के इंस्पेक्टर एन दिलीप कुमार ने बताया कि विशाल वर्मा को मुजफ्फरपुर पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। आरोपित को हैदराबाद ले जाया जाएगा। हैदराबाद पुलिस की टीम ने जब बैंक मैनेजर विशाल वर्मा को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। विशाल ने अपने बयान में बताया कि वह मुजफ्फरपुर के ही रहने वाले शशांक नामक बिचौलिये के संपर्क में था।

शशांक उसे हर फर्जी चालू खाता खोलने के बदले 10 हजार रुपये नकद देता था। विशाल ने नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी भौतिक सत्यापन के फर्जी फर्मो के पते को सही ठहराया और डिजिटल केवाईसी कर खाते एक्टिवेट कर दिए। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया कि मैनेजर द्वारा खोले गए चालू खातों का इस्तेमाल देशव्यापी ठगी के लिए लाजिस्टिक हब के रूप में किया जा रहा था।

नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों ने पुलिस को भी चौंका दिया। इसमें ग्रीनलोस्कर एडवाइजर्स खाते से सबसे ज्यादा एक करोड़ 68 सात हजार 317 रुपये की की ठगी हुई। इसके खिलाफ देशभर में 43 केस दर्ज हैं।

फैशन वर्ल्ड खाते के जरिए 36 लाख 93 हजार 288 रुपये का फ्राड किया गया। भोले शंकर एंटरप्राइजेज अकाउंट से 30 लाख 10 हजार 350 रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया।

खुशी एंटरप्राइजेज खाते में 1 लाख 24 हजार 968 रुपये का फर्जीवाड़ा रिकार्ड हुआ। कुल मिलाकर इन चार मुख्य खातों से 2 करोड़ 36 लाख 35 हजार 923 रुपये का संदिग्ध लेनदेन उजागर हुआ है और देशभर में 70 से ज्यादा मामले दर्ज पाए गए हैं।

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