शिक्षा व्यवस्था में अराजकता, लगातार बढ़ती फीस, पेपरलीक और रोजगार के अवसरों की कमी का मुद्दा छात्र-युवा संसद में प्रमुखता से उठा। वक्ताओं ने कहा कि बदहाल शिक्षा व्यवस्था और बढ़ती बेरोजगारी से छात्रों और युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए छात्र-युवा संगठनों ने आंदोलन तेज करने का आह्वान किया। आइसा व आरवाईए की ओर से समाहरणालय परिसर में विश्वविद्यालय स्तरीय छात्र-युवा संसद का आयोजन किया गया। इसमें शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर वक्ताओं ने सरकार को घेरा।
जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष धनंजय ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर हो रही है। पेपरलीक की घटनाओं, फीस वृद्धि तथा स्कूल-कालेज और विश्वविद्यालयों को संसाधनहीन किए जाने से बड़ी संख्या में छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। धनंजय ने कहा कि 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता भी छात्रों को उच्च शिक्षा से बाहर करने का एक माध्यम है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें आर्थिक या शैक्षणिक परिस्थितियों के कारण कोई छात्र पढ़ाई से वंचित न हो। आइसा इन मुद्दों को लेकर शहर से गांव तक छात्र-युवा आंदोलन को तेज करेगा। आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा ने कहा कि देश में करोड़ों नौजवान बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। इसके बावजूद सरकार रोजगार सृजन को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। ठेका, पट्टा और आउटसोर्सिंग की नीति से स्थायी रोजगार के अवसर घट रहे हैं। यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। वक्ताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपरलीक की घटनाओं से युवाओं की मेहनत पर पानी फिर रहा है। इससे परीक्षा व्यवस्था के प्रति छात्रों का भरोसा भी कमजोर होता है। पेपरलीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने, शिक्षा को सुलभ बनाने और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई। कार्यक्रम को ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी, संदीप चौधरी, शेफाली, शाहिद कमाल, माले जिला सचिव जितेंद्र यादव, दीपक, छात्र नेता मनीष, प्राची, शिवम, साफी और कृष्णमोहन ने संबोधित किया। संचालन आइसा जिला संयोजक नीरज, मनीष, प्राची पराशर, आरवाईए जिला अध्यक्ष विवेक कुमार, उपाध्यक्ष शफीकुर रहमान, मो. एजाज और विकास रंजन ने संयुक्त रूप से किया।
