भारत और चीन ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर एक बार फिर सहमति जताई है। यह सहमति विदेश सचिव विक्रम मिस्री की दो दिवसीय बीजिंग यात्रा के दौरान हुई उच्चस्तरीय वार्ता में सामने आई। दोनों देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साझा दृष्टिकोण के अनुरूप द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों पक्षों ने व्यापार, आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही, सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
वार्ता के दौरान नाथू ला सहित लिपुलेख और शिपकी ला दर्रों के माध्यम से सीमा व्यापार फिर से शुरू करने के निर्णय की भी समीक्षा की गई। यह फैसला वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत लिया गया था।
पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने के लिए कई कूटनीतिक और सैन्य कदम उठाए हैं। दोनों देशों ने डेपसांग और डेमचोक सहित प्रमुख विवादित क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी की है।
भारत ने स्पष्ट किया है कि चीन के साथ संबंध आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर आगे बढ़ाए जाएंगे। दोनों देशों ने संवाद जारी रखते हुए सहयोग के नए अवसर तलाशने और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
