राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) देश के ग्रामीण अर्थतंत्र और कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर सशक्त बनाने में जुटा है। नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी के. वी. ने कहां कि संस्था कृषि प्रसंस्करण (एग्री-प्रोसेसिंग), डिजिटल ऋण वितरण और महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए कई दूरगामी योजनाओं पर काम कर रही है।
एक्सएलआरआई में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने आए नाबार्ड के चेयरमैन डॉ. शाजी के. वी. ने कहा कि
भारत का कृषि क्षेत्र अब केवल जीवन-यापन (सब्सिस्टेंस) का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह तेजी से प्रोसेसिंग और सरप्लस प्रोडक्शन की ओर बढ़ रहा है। ग्रामीण समृद्धि को ध्यान में रखते हुए नाबार्ड किसानों द्वारा तैयार अतिरिक्त उपज के लिए प्रोसेसिंग सुविधाएं विकसित कर रहा है और ग्रामीण उद्यमों (एंटरप्राइजेज) को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए एग्री इंफ्रा फंड, एनिमल हसबैंड्री इंफ्रा फंड और फिशरीज इंफ्रा फंड जैसे केंद्रीय फंडों का प्रबंधन नाबार्ड द्वारा किया जा रहा है।
एग्री स्टैक और डिजिटल केसीसी से तुरंत मिलेगा ऋण
कृषि ऋण की प्रक्रिया को सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए भारत सरकार के ‘एग्री स्टैक’ फ्रेमवर्क पर तेजी से काम हो रहा है। इसके तहत किसानों की पहचान, उनके भूमि रिकॉर्ड और फसल का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है। चेयरमैन ने बताया कि इस डिजिटल डेटाबेस की मदद से बैंकों के जरिए जल्द से जल्द और कम खर्च में ‘डिजिटल लोन’ और किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधाएं दी जा रही हैं।
सहकारिता और ग्रामीण बैंकों का कायाकल्प
सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नाबार्ड ने देश के करीब 70,000 प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) का कंप्यूटरीकरण पूरा कर लिया है। इन्हें मल्टी-परपज पैक्स के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि ये सिर्फ लोन देने तक सीमित न रहकर कॉमन सर्विस सेंटर और अन्य व्यावसायिक सेवाएं भी दे सकें।
सहकारी बैंकों के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सहकारिता मंत्रालय के दिशा-निर्देशों पर ‘सहकार सारथी प्राइवेट लिमिटेड’ (SSPL) की स्थापना की गई है। इसके जरिए सीबीएस (CBS), लोन ओरिजिनेशन सिस्टम और मोबाइल एप्लीकेशन जल्द ही लॉन्च किए जाएंगे। वहीं क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) में भी ‘वन स्टेट, वन आरआरबी’ और डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
33% एसएचजी महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’
महिला सशक्तीकरण पर जोर देते हुए नाबार्ड प्रमुख ने बताया कि देश के स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी लगभग 11 से 12 करोड़ महिलाओं में से एक-तिहाई (33%) महिलाएं यानी सवा तीन से साढ़े तीन करोड़ सदस्य ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। सरकार के 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए नाबार्ड, ग्रामीण विकास विभाग और विभिन्न बैंकों के साथ मिलकर इन समूहों को उद्यमों में बदलने और उनके लिए विशेष डिजिटल लोन उत्पाद तैयार करने में जुटा है।
ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर फोकस
नाबार्ड विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर बुनियादी ढांचे के विकास पर काम कर रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़े और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।
